Shaurya Path: Galwan में क्या हुआ था? क्या भारत ने जमीन खोई? Sector Commander रहे Brig. Sourabh Singh Shekhawat ने दी बड़ी जानकारी

By नीरज कुमार दुबे | Feb 11, 2026

पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ में कथित रूप से कही गयी बातों को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी इन दिनों जोरदार तरीके से राजनीति कर रहे हैं। जवाब में सत्तारुढ़ भाजपा का कहना है कि नरवणे द्वारा उनकी किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के प्रकाशक के बयान को सोशल मीडिया पर साझा करने से राहुल गांधी बेनकाब हो गए हैं और देश के सामने एक ‘‘काल्पनिक तथ्य’’ पेश करने के लिए कांग्रेस नेता को माफी मांगनी चाहिए। देखा जाये तो राष्ट्रीय सुरक्षा पर संदेह जताते हुए राहुल गांधी इन दिनों जो सवाल उठा रहे हैं उसने सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक हंगामा मचाया हुआ है। दोनों ओर से नेताओं के बयानों का शोर इतना ज्यादा है कि जनता भी असमंजस में पड़ गयी है और यह जानना चाहती है कि आखिर सच में हुआ क्या था?

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आतंकवाद विरोधी अभियानों, पर्वतारोहण और विशिष्ट सेवा में वीरतापूर्ण कार्यों के लिए कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र, सेना पदक और विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित ब्रिगेडियर शेखावत ने कहा कि दुश्मन केवल “ताकत और बल की भाषा” समझता है। उन्होंने कहा कि एक बार जब इस ताकत का प्रदर्शन किया गया, तो तनाव कम हो गया। उन्होंने बताया कि गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प में एक भी गोली नहीं चली थी। दोनों देशों के सैनिकों ने झड़प में पत्थरों और लोहे की छड़ों का इस्तेमाल किया था। ब्रिगेडियर शेखावत ने कहा कि खोपड़ी फोड़ दी गई और ऐसी स्थिति भी आई, जहां सैनिकों को बर्फ से ढकी नदियों में धकेल दिया गया और वे डूब गए। उन्होंने कहा कि यही “आमने-सामने की लड़ाई” का वास्तविक स्वरूप है।

ब्रिगेडियर शेखावत ने कहा, “सैनिकों को इस तरह की क्रूरता के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार रहना चाहिए, क्योंकि ऐसे प्रत्यक्ष टकराव फिर से होंगे।'' उन्होंने कहा कि युद्धक्षेत्र इंस्टाग्राम, फेसबुक या तस्वीरों की दुनिया नहीं है। युद्धक्षेत्र बेहद क्रूर होता है। उन्होंने कहा कि गलवान में सैन्य झड़प के बाद की स्थिति बेहद तनावपूर्ण थी, जिसमें बड़े बदलाव और सुधार लागू किए जा रहे थे, जबकि सभी मौसमों और परिस्थितियों में अटूट प्रतिबद्धता और अथक तीव्रता के साथ प्रशिक्षण जारी रहा। ब्रिगेडियर शेखावत ने कहा, “बख्तरबंद वाहन, टैंक, नये शामिल किए गए वाहन, घोड़े और विमान, हर संभव साधन का इस्तेमाल किया गया। सीमा पर हथियारों और उपकरणों को उन्नत और मजबूत किया गया।” उन्होंने कहा कि वहां का इलाका और मौसम दुश्मन से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण था। ब्रिगेडियर शेखावत ने कहा कि शुरुआत में उनके अपने चीनी समकक्ष के बीच संबंध बेहद तनावपूर्ण थे और इस दौरान “आक्रामक गश्त, शक्ति प्रदर्शन और छोटी-मोटी झड़पें” जारी थीं, लेकिन दोनों पक्षों के एक-दूसरे की तैयारियों और ताकत का आकलन के बाद स्थिति शांत हो गई।

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