Secunderabad Cantonment Weapons Theft : Army Armoury में लगी सेंध, 4 AK-203 समेत 12 घातक हथियार और गोला-बारूद गायब! Mastermind की तलाश तेज

By नीरज कुमार दुबे | Sep 03, 2026

देश की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली एक सनसनीखेज घटना में तेलंगाना के सिकंदराबाद कैंटोनमेंट स्थित सेना के अत्यधिक सुरक्षित परिसर से 12 हथियार, भारी मात्रा में गोलियां और नाइट-विजन उपकरण गायब होने की खबर ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि चौबीसों घंटे सुरक्षा में रहने वाले आर्मी आर्मरी से इतने घातक हथियार आखिर गायब कैसे हो गए? जांच की दिशा अब तेजी से ‘इनसाइड जॉब’ यानी अंदरूनी मिलीभगत की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है।

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जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि हथियारों की आखिरी बार भौतिक रूप से गिनती 30 अगस्त की शाम करीब 6 बजे की गई थी। इसके बाद 31 अगस्त की सुबह लगभग 7:50 बजे, जब कोटे यानी आर्मरी और बैटालियन मैगजीन खोली गई, तो ताले टूटे मिले और हथियार तथा गोला-बारूद गायब था। इस तरह वारदात के लिए लगभग 12 घंटे की संभावित समय-सीमा सामने आई है।

‘बाहरी घुसपैठ मुश्किल’, अंदरूनी भूमिका पर गहराता शक

पुलिस सूत्रों के अनुसार, इतनी कड़ी सुरक्षा वाले आर्मरी में बिना किसी की जानकारी के बाहरी व्यक्ति का घुसना और हथियार लेकर निकल जाना बेहद मुश्किल माना जा रहा है। जांच अधिकारियों के शक के पीछे कई बड़े कारण हैं। आर्मरी की चौबीसों घंटे सुरक्षा होती है, वारदात के दौरान सेना के गार्ड मौजूद थे और सबसे अहम बात यह है कि गार्डों ने मैनुअल अलार्म तक नहीं बजाया।

जांच से जुड़े एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, मामला “सबसे अधिक संभावना के साथ अंदरूनी काम” प्रतीत होता है। पुलिस ने आर्मरी और हथियारों के भंडारण क्षेत्र तक पहुंच रखने वाले कुछ रक्षा कर्मियों से पूछताछ शुरू कर दी है। इनमें अनुभवी और युवा दोनों तरह के कर्मी शामिल बताए जा रहे हैं। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि ड्यूटी पर तैनात गार्डों को घटना की भनक क्यों नहीं लगी या फिर वे जानबूझकर अनभिज्ञ बने रहे।

इस दौरान कैंटोनमेंट में आने-जाने वाले वाहनों की गतिविधियों की भी जांच हो रही है। आशंका जताई गई है कि चोरी या गायब हुए हथियार कैंटोनमेंट से बाहर पहुंच चुके हो सकते हैं और अब अनधिकृत लोगों के कब्जे में हैं। मामले में सरकारी संपत्ति की चोरी और अतिक्रमण से संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।

मिलिट्री इंटेलिजेंस भी जांच में शामिल

मामले की गंभीरता को देखते हुए मिलिट्री इंटेलिजेंस भी जांच में शामिल हो गई है। जांच को बेहद गोपनीय रखा जा रहा है और बताया जा रहा है कि डिफेंस एरिया के भीतर एक अज्ञात स्थान से जांच की जा रही है। यहां तक कि स्थानीय स्तर के पुलिसकर्मियों को भी जांच की प्रगति और पूछताछ के विवरण की सीमित जानकारी ही है।

सेना ने भी अपने स्तर पर हथियारों और गोला-बारूद के रिकॉर्ड की दोबारा जांच की है। अधिकृत स्टोरेज क्षेत्रों, आसपास के परिसरों और हथियार जारी करने तथा वापस जमा कराने वाले रजिस्टरों की पड़ताल की जा रही है। जिन कर्मियों को कोटे और हथियारों की कस्टडी वाले क्षेत्रों तक अधिकृत पहुंच थी, उनकी पहचान कर पूछताछ की जा रही है।

दूसरी ओर, सेना के पूर्व अधिकारी और रणनीतिक मामलों के टिप्पणीकार मेजर प्रोबल दासगुप्ता ने इसे “गंभीर और असामान्य मामला” बताया है। उनका मानना है कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा आर्मरी में सेंध लगाकर अगली सुबह तक बिना पकड़े हथियार निकाल ले जाना मुश्किल प्रतीत होता है।

उधर, पूरे मामले पर गोपनीयता इसलिए भी रखी जा रही है क्योंकि यह सीधे सेना के संवेदनशील प्रतिष्ठान और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। रक्षा अधिकारी जानकारी साझा करने से बच रहे हैं और संवेदनशील रक्षा सूचनाओं की सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों का हवाला दिया जा रहा है।

कैंटोनमेंट में सख्ती, सड़कें बंद

हथियार गायब होने की घटना के बाद सिकंदराबाद कैंटोनमेंट में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। कई सड़कों को आम नागरिकों के लिए बंद कर दिया गया है। R.K. Puram और Marredpally के आसपास AOC और NSG रोड सहित डिफेंस एरिया से गुजरने वाले रास्तों पर नागरिक यातायात प्रतिबंधित है। स्कूल खुलने के बावजूद अभिभावकों को कैंटोनमेंट के गेट पर बच्चों को छोड़कर तुरंत लौटने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें परिसर में प्रवेश करने या अंदर इंतजार करने की अनुमति नहीं है। CSD कैंटीन को भी खोला गया है, लेकिन प्रवेश केवल वैध पहचान पत्र रखने वाले लोगों को ही दिया जा रहा है और उनके साथ किसी अन्य व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति नहीं है।

कर्नाटक तक बढ़ी चिंता, ‘आंतरिक सुरक्षा का गंभीर खतरा’

इस बीच, घटना का असर पड़ोसी राज्य कर्नाटक तक महसूस किया जा रहा है। वहां के पूर्व पुलिस अधिकारियों ने अंतरराज्यीय सीमाओं पर सतर्कता बढ़ाने की मांग की है। पूर्व DG&IGP एसटी रमेश ने इसे गंभीर आंतरिक सुरक्षा का मुद्दा बताते हुए कहा कि असॉल्ट राइफलें अत्यंत घातक हथियार हैं और इनके गायब होने की संभावनाएं डर पैदा करती हैं। वहीं, कुछ पूर्व अधिकारियों का मानना है कि यदि इतने हथियार एक साथ गायब हुए हैं तो इसके पीछे कोई खास उद्देश्य हो सकता है। अंदरूनी भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता और ऐसी स्थिति में हथियार सामान्य अपराधियों की तुलना में नक्सली या आतंकी संगठनों के लिए अधिक उपयोगी हो सकते हैं।

फिलहाल जांच के सामने तीन सबसे बड़े सवाल हैं। इतनी कड़ी सुरक्षा के बावजूद हथियार गायब कैसे हुए? इसके पीछे कौन लोग हैं? और सबसे अहम, क्या ये घातक हथियार अब कैंटोनमेंट की सीमा पार कर चुके हैं? जवाब मिलने तक सिकंदराबाद कैंटोनमेंट की यह घटना सिर्फ चोरी का मामला नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था के सामने खड़ा एक बेहद गंभीर और चिंताजनक सवाल बनी रहेगी।

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