अमेरिकी दादागिरी के खिलाफ मोदी का दृढ़ रुख देखकर कई अन्य देशों का हौसला भी बढ़ रहा है

By नीरज कुमार दुबे | Sep 02, 2025

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल के दिनों में यह साबित कर दिया है कि भारत किसी भी दबाव में झुकने वाला देश नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सलाहकारों ने भारत को रूस से तेल खरीदने और चीन-रूस के साथ संवाद रखने पर लगातार कोसा, लेकिन मोदी ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूती से थामे रखा। इसका नतीजा यह हुआ कि न केवल भारत की साख और आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि जापान समेत कई एशियाई देशों का भी मनोबल ऊँचा हुआ है, जो अमेरिका की एकतरफा दादागिरी से असहज रहे हैं।

दूसरी ओर, ट्रंप को अब यह अहसास हो रहा है कि भारत पर दबाव बनाने की उनकी नीति उल्टी पड़ गई है। तेल, टैरिफ और यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत को घेरने की अमेरिकी कोशिशों ने दोनों देशों के ऐतिहासिक रिश्तों को दरार की ओर धकेल दिया है। यह विडंबना ही है कि ट्रंप ने अमेरिकी हितों के नाम पर बार-बार अपने व्यक्तिगत कारोबारी स्वार्थ साधे, कभी पाकिस्तान की वकालत करके, तो कभी चीन से बेमतलब का बैर लेकर। यही वजह है कि अमेरिका के भीतर ही उनकी आलोचना बढ़ रही है और उनके नेतृत्व की नाकामी उजागर हो रही है।

इसे भी पढ़ें: चीन-भारत के मिठास भरे संबंधों से नयी विश्व संरचना संभव

इसके विपरीत, वैश्विक मंच पर मोदी एक ऐसे नेता के रूप में उभरे हैं जो न केवल अमेरिका की आँखों में आँखें डालकर बात कर सकता है, बल्कि बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का भी प्रतिनिधि बनकर खड़ा है। उन्होंने यह संदेश साफ़ कर दिया है कि भारत का लोकतंत्र किसी की कठपुतली नहीं है।

असल में, यह परिदृश्य दर्शाता है कि मोदी बनाम ट्रंप की टक्कर अब सिर्फ़ भारत-अमेरिका संबंधों का सवाल नहीं रह गई है, बल्कि यह वैश्विक राजनीति की दिशा तय करने वाला विमर्श बन चुका है। भारत की रणनीतिक स्वायत्तता जितनी मजबूत होगी, उतना ही दुनिया के अन्य देशों को भी अमेरिका के दबाव से मुक्त होकर स्वतंत्र कूटनीति अपनाने का साहस मिलेगा।

इसके अलावा, शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रदर्शन केवल कूटनीतिक उपस्थिति भर नहीं था, बल्कि यह भारत की वैश्विक पहचान और मोदी की व्यक्तिगत नेतृत्व क्षमता का स्पष्ट साक्ष्य भी बन गया। इस सम्मेलन में जब व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग जैसे दिग्गज नेता भी सबसे अधिक संवाद मोदी से करते दिखे, तब यह संदेश पूरी दुनिया तक पहुँचा कि आज भारत केवल एक दर्शक या मध्यस्थ की भूमिका नहीं निभा रहा, बल्कि एजेंडा-निर्धारक शक्ति के रूप में उभर चुका है।

मोदी की छवि यहाँ एक संतुलित वैश्विक नेता के रूप में उभरती है— जो अमेरिका और पश्चिमी देशों से साझेदारी रखता है, रूस से ऐतिहासिक संबंध बनाए रखता है और चीन जैसे प्रतिस्पर्धी पड़ोसी से भी संवाद कायम रखता है। यही रणनीतिक संतुलन भारत को विशेष बनाता है और मोदी को एक ऐसे नेता के रूप में स्थापित करता है, जिसकी बात सुनी जाती है और जिसका रुख अनदेखा करना कठिन है।

बहरहाल, पूरी दुनिया के लिए यह संकेत है कि भारत अब न तो दबाव में झुकने वाला देश है, न ही किसी खेमे का अंधानुयायी। भारत का नेतृत्व अपने राष्ट्रीय हितों के साथ-साथ वैश्विक स्थिरता और शांति की दिशा में ठोस पहल करने की क्षमता रखता है। मोदी के इर्द-गिर्द SCO में केंद्रित यह संवाद इस बात का सबूत है कि वैश्विक मंचों पर भारत की रणनीतिक स्वायत्तता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। संक्षेप में कहा जाये तो SCO शिखर सम्मेलन से निकला सबसे बड़ा संदेश यही है— “भारत अब केवल एक उभरती हुई शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीति का धुरी बन चुका है, और नरेंद्र मोदी उसका सबसे मुखर चेहरा हैं।''

प्रमुख खबरें

धुरंधर धामी ने चलाया Bulldozer! Rajnath Singh बोले- Uttarakhand में अवैध प्रवासियों की No Entry

ईरान का US-Israel पर बड़ा आरोप, Natanz न्यूक्लियर प्लांट पर फिर हमला, क्या है पूरा मामला?

World Down Syndrome Day: डाउन सिंड्रोम कोई अभिशाप नहीं, एक Genetic Condition है, जानें इसके Symptoms और इलाज

Mehbooba Mufti ने Eid पर Palestine, Lebanon और Iran के लिए की दुआ, खाड़ी पर तेहरान के हमले को किया अनदेखा