Independence day: आत्मनिर्भरता बनाम मेरी माटी मेरा देश

By डॉ. शंकर सुवन सिंह | Aug 15, 2023

अपनी मिट्टी से लगाव रखने वाला व्यक्ति ही स्वदेशी होता है। स्वदेशी होने के लिए स्वतंत्र होना जरुरी है। अतएव किसी भी देश की मिट्टी का जुड़ाव उस देश की स्वतंत्रता से होता है। देश स्वतंत्र होगा तभी हम स्वदेशी कहलाएंगे। स्वतन्त्रता को बनाए रखने के लिए स्वदेशी, स्वावलम्बी, स्वाभिमानी और आत्मनिर्भर होना आवश्यक है। हिन्दू संस्कृति में राम द्वारा किया गया आदर्श शासन रामराज्य के नाम से प्रसिद्ध है। वर्तमान समय में रामराज्य का प्रयोग सर्वोत्कृष्ट शासन या आदर्श शासन के रूप (प्रतीक) के तौर पर किया जाता है। रामराज्य, लोकतन्त्र का परिमार्जित रूप माना जा सकता है। वैश्विक स्तर पर रामराज्य की स्थापना गांधीजी की चाह थी। गांधीजी ने भारत में अंग्रेजी शासन से मुक्ति के बाद ग्राम स्वराज के रूप में रामराज्य की कल्पना की थी। आत्मनिर्भरता, रामराज्य की परिकल्पना पर आधारित है। आत्मनिर्भर भारत की नींव गांधी के रामराज्य पर टिकी थी। गाँधी का स्वराज्य, रामराज्य की परिकल्पना का आधार था। स्वराज का अर्थ है जनप्रतिनिधियों द्वारा संचालित ऐसी व्यवस्था जो जन-आवश्यकताओं तथा जन-आकांक्षाओं के अनुरूप हो। यही स्वराज्य रामराज्य कहलाता है। स्वराज का तात्पर्य स्वतंत्रता से है। आत्मनिर्भरता स्वतन्त्रता का मूल है। बिना आत्मनिर्भर हुए स्वतंत्र नहीं हुआ जा सकता है। कहने का  तात्पर्य यह  है कि रामराज्य वो शासन है जिसमे सभी स्वतंत्र होते हैं। ऐसी स्वतंत्रता जिसमे धर्म और रंग भेद के आधार पर विषमता न पैदा की जाए। यही स्वतन्त्रता गाँधी का रामराज्य कहलाया। गांधी का रामराज्य सत्य और अहिंसा पर आधारित था। गांधी के रामराज्य को व्यवहार में उतारना होगा। सत्य और अहिंसा को आचरण में उतारने की जरुरत है। गांधी की विशेषताओं को रामराज्य का आधार बनाना होगा। रामराज्य लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करता है। अभियान लोगों में जागरूकता पैदा करता है। मेरी माटी मेरा देश अभियान का लक्ष्य देश प्रेम के प्रति जागरूक होना है। 

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पंच प्रणों जो मेरी माटी मेरा देश के तहत लिए वो इस प्रकार हैं 

1. देश की रक्षा करने वाले शहीदों को सम्मान देना है। 

2. हमारे मन में बसी गुलामी की मानसिकता को जड़ से बाहर निकालना। 

3. देश के प्रत्येक नागरिक को एकजुट एवं एकता के साथ कर्तव्यबद्ध रहना। 

4. भारत देश को 2047 में  विकसित देश बनाने का सपना साकार करना है। 

5. हमारे देश के नागरिक होने के कर्तव्य को निभा कर देश की समृद्ध विरासत पर गर्व करना है। 

मेरी माटी मेरा देश अभियान के नाम से 1967 में आई उपकार फिल्म का गाना याद आता है कि मेरे देश की मिट्टी सोना उगले उगले हीरे मोती मेरे देश की मिट्टी। वाकई में विश्व में भारत देश जैसा देश कोई और नहीं। जहां की मिट्टी और हवा जड़ी और बूटी का काम करते हैं। तभी तो भारत कोरोना जैसी स्थिति से भी निपटने में सक्षम रहा। अतएव हम कह सकते हैं कि मेरी माटी मेरा देश अभियान अक्षुण्ण एकता की मिसाल है। हिंदुस्तान संस्कृति और संस्कारों की धरती रही है। यहां 2500 ईसा पूर्व ऋग्वेद की रचना हुई। योग के जनक महर्षि पतंजलि थे। योग हजारों वर्षों पुरानी पद्वति है। आज कल के जनप्रतिनिधि धर्म की आड़ में इन पुरानी संस्कृतियों का दुरूपयोग कर भारतीय संस्कृति को राजनीति का हिस्सा बना दिए हैं। 

हिन्दुस्तान को गांधी का रामराज्य चाहिए। राजनैतिक पार्टिया वोट को साधने के लिए राम राज्य का सहारा लेती हैं। राम राज्य भगवान् राम के पुरुषार्थ और शासन का द्योतक है। भगवान् राम सहिष्णुता के प्रतीक थे। राम सत्य के प्रतीक थे। तभी तो भगवान् राम ने रामराज्य स्थापित किया था। आज राजनैतिक पार्टियों ने भगवान् राम, कृष्ण, हनुमान, मोहम्मद पैगम्बर, ईसा मसीह आदि को वोट बैंक का आधार बना लिया है। अतएव अब राम राज्य का पतन हो चुका है। आज आत्मनिर्भर भारत बनाने की बात हो रही है और वहीँ दूसरी ओर विदेशी कम्पनियाँ और विदेशी सामान की हिन्दुस्तान में बाढ़ आ गई है। प्रत्येक संस्था का निजीकरण होता जा रहा है। बेरोजगारी बढ़ रही है। आत्महत्याओं का ग्राफ बढ़ा है। यदि आत्मनिर्भरता, स्वतन्त्रता, स्वावलम्बन, स्वाभिमान की बात करनी हो तो गांधी के रामराज्य की कल्पना करनी होगी। अतएव हम कह सकते हैं कि आत्मनिर्भरता, गांधी के रामराज्य की परिकल्पना पर आधारित होनी चाहिए। सभी राजनैतिक पार्टियों को राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के विचारों को आत्मसात करने की जरुरत है। वास्तव में भारत आत्मनिर्भर तभी बन पाएगा। माननीय प्रधानमंत्री जी को भारत को आत्मनिर्भर भारत बनाने में काफी वक्त लग जाएगा। आत्मनिर्भर भारत के बिना कोई भी जागरूकता किसी काम की नहीं। मेरी माटी मेरा देश अभियान के लक्ष्य को आत्मनिर्भरता के बिना नहीं पाया जा सकता है। 

- डॉ. शंकर सुवन सिंह

वरिष्ठ स्तम्भकार एवं विचारक

असिस्टेंट प्रोफेसर,

कृषि विश्वविद्यालय,

नैनी, प्रयागराज (यू.पी.)

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