आत्मनिर्भर भारत का मतलब दुनिया से कटना या अकेले चलना नहीं: सीतारमण

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | May 13, 2020

नयी दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्म-निर्भर भारत के आह्वान का मतलब यह कतई नहीं हम दुनिया से कट जाएंगे। उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह भी नहीं है कि हम सिर्फ ‘अंदर’ ही देखेंगे और ‘अलगाववादी’ देश बन जाएंगे। वित्त मंत्री ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री के इस आह्वान का मतलब एक भरोसे वाले भारत से है जो अपनी ताकत पर निर्भर रह सकता है और साथ ही वैश्विक स्तर पर भी अपना योगदान दे सकता है। मंत्री के पास क्षमता और उद्यमिता है, जिससे वह क्षमता का निर्माण कर सकता है और दुनिया की मदद कर सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘निश्चित रूप से जब प्रधानमंत्री ‘आत्मनिर्भर’ भारत की बात कर रहे हैं तो उसका मतलब सिर्फ देश के अंदरही देखना नहीं है और न ही खुद को दुनिया से काटना है।’’ 

इसे भी पढ़ें: MSME को बिना गारंटी के 3 लाख करोड़ रुपए का लोन दिया जाएगा: निर्मला सीतारमण 

सीतारमण ने यहां 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज पर संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘‘निश्चित रूप से यह एक विश्वास से परिपूर्ण भारत की ताकत को दिखाता है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि व्यक्तिगत रक्षा उपकरणों यानी पीपीई, मास्क और वेंटिलेटर का उत्पादन इन 40 दिनों में काफी तेजी से बढ़ा है।’’ मोदी ने मंगलवार को 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा करते हुए लोगों से स्थानीय उत्पादों की खरीद करने का आह्वान किया। उनके इस आह्वान को ‘संरक्षणवाद’ से जोड़कर देखा जा रहा है। सीतारमण ने कहा कि 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज से वृद्धि को प्रोत्साहन मिलेगा और इससे हम एक आत्म-निर्भर भारत की ओर बढ़ सकेंगे। वित्त मंत्री ने कहा विभिन्न अंशधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद इस पैकेज को अंतिम रूप दिया गया है।

यहां सुने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का पूरा संबोधन

All the updates here:

प्रमुख खबरें

T20 World Cup 2026: डबल प्रेशर से घबराया Pakistan, क्या भारत के खिलाफ खेलेगा मैच?

Kedarnath के बाद अब Badrinath Dham की यात्रा भी आसान, Helicopter Shuttle Service का टेंडर जारी।

हल्के वक्त में घबराना नहीं, Captain SKY ने Team India को T20 World Cup के लिए दिया गुरुमंत्र

US Trade Deal पर Pawan Khera का बड़ा हमला, बोले- ये समझौता नहीं, बल्कि आत्मसमर्पण है