By Ankit Jaiswal | Oct 15, 2026
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। कमजोर वैश्विक संकेतों के बावजूद सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त के साथ बंद हुए। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, रुपये की मजबूती और आईटी, बैंकिंग तथा उपभोक्ता कंपनियों के शेयरों में खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया। निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी के चलते दोनों प्रमुख सूचकांकों में अच्छी तेजी दर्ज की गई है।
गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें गुरुवार को 1 डॉलर से ज्यादा गिर गईं। निवेशक एक ओर होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमलों के कारण तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका पर नजर रख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका की ओर से तेल की ढुलाई का खर्च कम करने के प्रयासों का भी असर दिखा। अमेरिका ने कुछ जहाजों पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने की दिशा में कदम उठाए हैं।
ब्रेंट कच्चे तेल का भाव 1.76 डॉलर यानी 1.75% गिरकर 104 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चे तेल की कीमत 1.02 डॉलर यानी 1.07% घटकर 94.07 डॉलर प्रति बैरल रह गई। तेल सस्ता होने से भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ती है। इससे महंगाई और कंपनियों की लागत को लेकर बाजार की चिंता कुछ कम हो सकती है।
इस बीच सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में तेजी बनी रही। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इन्फोसिस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और टेक महिंद्रा के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। कंपनियों के बेहतर नतीजों और एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली के कारण निवेशकों का रुख भारतीय आईटी शेयरों की ओर बढ़ा।
हालांकि, वैश्विक बाजारों से संकेत कमजोर रहे। अमेरिका में सितंबर की महंगाई उम्मीद से ज्यादा रहने के बाद एशियाई बाजारों में गिरावट आई। दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 7% फिसला, जबकि जापान का निक्केई 225 भी 1.3% नीचे रहा। अमेरिका के शेयर बाजार में भी बुधवार को गिरावट दर्ज की गई, जहां एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयर दबाव में रहे।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के मुताबिक, एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में सुधार भारतीय बाजार के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। उनका मानना है कि भारतीय शेयर बेचकर इन कंपनियों में निवेश कर रहे विदेशी संस्थागत निवेशक अपनी रणनीति बदल सकते हैं। आगामी बजट में दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर की समीक्षा के संकेत भी बाजार को सहारा दे सकते हैं।
रुपये की मजबूती ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। गुरुवार को रुपया शुरुआती कारोबार में 0.2% मजबूत होकर डॉलर के मुकाबले 94.92 पर पहुंच गया। पिछले सप्ताहांत भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपये में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए थे। हालांकि, जानकारों का मानना है कि इन उपायों का असर फिलहाल सीमित समय तक रह सकता है और वैश्विक दबाव बने रहने की आशंका है।
कुल मिलाकर, तेल की कीमतों में गिरावट, रुपये की मजबूती और चुनिंदा क्षेत्रों में खरीदारी से बाजार को राहत मिली है। हालांकि, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, वैश्विक महंगाई और कच्चे तेल की आगे की चाल पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।