क्या श्रीलंका जैसी होने वाली है पाकिस्तान की हालत? ईंधन बचाने के लिए शहबाज शरीफ उठाने जा रहे ये कदम

By अभिनय आकाश | May 23, 2022

भारत की मोदी सरकार ने जहां एक तरफ  ने पेट्रोल पर 9.5 रुपये और डीजल पर 7 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी घटाने का ऐलान किया। इसके बाद लोगों को राहत मिली है। करीब सात महीने के अंदर लगातार दूसरी बार केंद्र सरकार की तरफ से एक्साइज ड्यूटी घटाई गई है। वहीं भारत का पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान तेल की  बढ़ती खपत और उच्च अंतरराष्ट्रीय कीमतों के कारण आयाज बिल के बीच सप्ताह में कार्य दिवसों को कम करके ईंधन को बचाने की योजना पर विचार कर रहा है। पाकिस्तान की सरकार को उम्मीद है कि इससे अनुमानित वार्षिक विदेशी मुद्रा में 2.7 बिलियन डॉलर की बचत होगी। 

 रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष के 10 महीनों (जुलाई-अप्रैल) के लिए पाकिस्तान का कुल तेल आयात 17 बिलियन अमरीकी डालर से अधिक हो गया है, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 96 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्शाता है। इसमें 8.5 अरब डॉलर के पेट्रोलियम उत्पादों का आयात और 4.2 अरब डॉलर के पेट्रोलियम क्रूड का आयात शामिल है, जो क्रमश: 121 प्रतिशत और 75 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि संबंधित प्राधिकरणों - बिजली और पेट्रोलियम डिवीजनों को सलाह दी गई थी कि वे किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विभिन्न क्षेत्रों के लागत लाभ विश्लेषण के साथ इस मामले को समग्र रूप से लेने के लिए बिजली संरक्षण सहित अपने अनुमानों के साथ आएं। 

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पेट्रोलियम खपत के रूप में अतिरिक्त बोझ पड़ गया

अधिकारी ने कहा कि संबंधित अधिकारियों- बिजली और पेट्रोलियम प्रभाग को सलाह दी गई थी कि वे किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विभिन्न क्षेत्रों के लागत और लाभ के विश्लेषण, बिजली संरक्षण सहित अपने अनुमानों को बतायें। चालू वित्त वर्ष के पहले 10 महीनों के दौरान, तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का आयात 3.7 अरब अमेरिकी डॉलर था, जो 83 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है, हालांकि आयात मात्रा कम थी। खबर में कहा गया है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कार्य दिवसों को सप्ताह में पांच से बढ़ाकर छह दिन करने का फैसला किया, जिससे बिजली और पेट्रोलियम खपत के रूप में अतिरिक्त बोझ पड़ गया था। 

 दिनों दिन खराब होते जा रहे आर्थिक हालात 

पाकिस्तान के आर्थिक हालात दिनों दिन खराब होते जा रहे हैं। पाकिस्तानी करेंसी की स्थिति इस समय अपने सबसे बुरे दौर में है। डॉलर के मुकाबले यह 200 पाकिस्तानी रुपये प्रति डालर के पार जा चुका है। वहीं, इस देश का विदेशी मुद्रा भंडार दो महीने से भी कम के आयात लायक ही बचा है। इसके साथ ही भारी भरकम कर्ज के बोझ में दबे पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई है। 

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