Shaheed Diwas 2026 | 'भारत माता के वीर सपूतों का बलिदान सदैव प्रेरित करेगा', PM Modi ने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को किया नमन

By रेनू तिवारी | Mar 23, 2026

आज पूरा देश 'शहीद दिवस' के अवसर पर उन महान क्रांतिकारियों को याद कर रहा है, जिन्होंने भारत की आजादी के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहीद भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु को उनकी पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि राष्ट्र उनके साहस के आगे नतमस्तक है।

शहीद दिवस क्यों मनाया जाता है?

शहीद दिवस, जो हर साल 23 मार्च को मनाया जाता है, उस दिन की याद दिलाता है जब 1931 में अंग्रेजों द्वारा इन तीनों क्रांतिकारियों को फांसी दी गई थी। तब से, उनका बलिदान भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई का एक शक्तिशाली प्रतीक बन गया है। इस दिन को पूरे देश में श्रद्धांजलि सभाओं, कार्यक्रमों और आयोजनों के साथ याद किया जाता है, जो उनके योगदान का सम्मान करते हैं और उनकी विरासत को जीवित रखते हैं।

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उनकी सफलता के पीछे की कहानी

उनकी फांसी तक ले जाने वाली घटनाओं की शुरुआत 1928 में हुई, जब साइमन कमीशन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भड़क उठे। लाहौर में ऐसे ही एक विरोध प्रदर्शन के दौरान, स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय पुलिस के लाठीचार्ज में घायल हो गए और बाद में उनका निधन हो गया। इस घटना ने भगत सिंह और उनके साथियों को गहरा आघात पहुँचाया। इसके जवाब में, उन्होंने इस हमले के लिए जिम्मेदार एक ब्रिटिश अधिकारी को निशाना बनाने की योजना बनाई। हालाँकि, गलती से उन्होंने एक दूसरे अधिकारी, जॉन सॉन्डर्स की हत्या कर दी।

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1929 में, भगत सिंह ने बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर, ब्रिटिश कानूनों के विरोध में दिल्ली स्थित केंद्रीय विधान सभा में एक प्रतीकात्मक बम धमाका भी किया था। इस कृत्य का उद्देश्य एक सशक्त संदेश देना था, न कि किसी को नुकसान पहुँचाना। 23 मार्च, 1931 को उन्हें राजगुरु और सुखदेव के साथ लाहौर जेल में फाँसी दे दी गई।

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