18 फ्लॉप फिल्मों के बाद भी नहीं मानी हार, शम्मी कपूर ने काबिलियत के दम पर अपना लोहा मनवाया

By रेनू तिवारी | Oct 21, 2022

'चाहे कोई मुझे जंगली कहे... याहू' एक ऐसा गीत है जो पीढ़ियों से प्रासंगिक रहा है और यह दिवंगत बॉलीवुड किंवदंती शम्मी कपूर की विरासत भी है। अपने करिश्माई व्यक्तित्व और बेजोड़ प्रतिभा के लिए जाने जाने वाले शम्मी कपूर 'कपूर खानदान' की अभिनय विरासत के अग्रदूतों में से एक थे और उन्होंने अपनी काबिलियत से हमेशा के लिए अपने फैंस के दिलों में एक विशेष स्थान बनाया। शम्मी कपूर ने अपने करियर के पड़ाव में मौजूदा समय के लगभग सभी प्रमुख सितारों के साथ काम किया जिसमें माधुरी दीक्षित, ऐश्वर्या राय, सलमान खान और कई अन्य शामिल हैं। 21 अक्टूबर को उनकी जयंती पर हम आपको उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ खास किस्सों के बारे में बताने जा रहें हैं।

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पृथ्वीराज कपूर और रामशर्णी कपूर (नी मेहरा) के बेटे के रूप में जन्में शम्मी कपूर का जन्म के समय उनका नाम शमशेर राज कपूर रखा गया था। उनके दोनों भाई राज कपूर और शशि कपूर सफल हिंदी फिल्म अभिनेता थे। वह अपने पिता पृथ्वीराज कपूर के छोटे भाई अभिनेता त्रिलोक कपूर के भतीजे हैं। वह गायक जुग्गल किशोर मेहरा के पहले चचेरे भाई थे, जिनकी पोती अभिनेत्री-गायिका सलमा आगा हैं। इस प्रकार शम्मी कपूर सलमा आगा के चाचा थे।

जैसे ही हम शम्मी कपूर का नाम सुनते हैं, हमारे दिमाग तुरंत "याहू" या "ओह हसीना ज़ुल्फ़ोन वाली" गाना आ जाता है। उन्होंने अपने करियर के दौरान अपनी विद्युत ऊर्जा, तेजतर्रार व्यक्तित्व और 'शम्मी जादू' से प्रभावित गीतों के साथ एक बड़ी फैन फॉलोइंग बना ली थी। अभिनेता शम्मी कपूर निस्संदेह, बॉलीवुड के गेमचेंजर थे क्योंकि उन्होंने 1960 के दशक में पारंपरिक 'हीरो' की छवी को बदल दिया था। जब दिलीप कुमार, देव आनंद और राज कपूर की तिकड़ी सिनेमा पर राज कर रही थी। तीनों का अपना-अपना व्यक्तित्व था- दिलीप ट्रेजेडी किंग थे, देव आनंद महानगरीय व्यक्ति थे, जबकि राज कपूर सोने के दिल वाले प्यारे 'आवारा' थे। शम्मी स्वाभाविक रूप से इन तीनों से ही अलग थे लेकिन एक क्रांति की तरह उन्होंने बॉलीवुड में हीरो की छवी का बदला और अपने अंदाज से लोगों के दिलों पर छाप छोड़ी।

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उनके निजी जीवन के बारे में एक किस्सा पत्रकार रऊफ अहमद ने मिड-डे के साथ एक विशेष साक्षात्कार में साझा किया था जिसमें उन्होंने बताया था कि जब शम्मी कपूर ने गीता बाली (उनकी पहली पत्नी) से गुपचुप तरीके से शादी करने का फैसला किया, तो उन्हें डर था कि कपूर परिवार उन्हें मंजूर नहीं करेगा। इसके पीछ कारण था कि गीता बाली एक एक्ट्रेस थी और उम्र में भी शम्मी से बड़ी थी ऐसे में काफी मुश्किल था कि कपूर खानदार दोनों की शादी के लिए इजाजत देता। अपने इस डर से निपटने के लिए उन्होंने कॉमेडियन जॉनी वॉकर की मदद लेने का फैसला किया। वॉकर ने अपनी पत्नी नूरजहां से गुपचुप तरीके से शादी कर ली थी। लेकिन वॉकर ने शम्मी से अपनी राय देते हुए कहा था कि 'तुम्हारे लिए यह मेरे जितना आसान नहीं होगा। मुझे केवल एक मुल्ला की व्यवस्था करनी थी और मेरी शादी हो गयी तुम्हें हिंदू रीति रिवाजों से शादी करनी हैं। बाद में दोनों ने मंदिर में शादी करने का फैसला किया था। उन्होंने एक किस्सा यह भी साझा किया कि वास्तव में शम्मी कपूर और गीता बाली इतने उत्सुक थे कि वे निर्धारित समय से पहले मंदिर पहुंच गए जिसके बाद उन्हें इंतजार भी करना पड़ा। जब उन्हें पता चला कि जल्दबाजी में वे सिंदूर लगाना भूल गए हैं तो कपूर ने उनकी जगह बाली की लिपस्टिक का इस्तेमाल किया। यानी कि शम्मी कपूर गीता बाली से बहुत ज्यादा प्यार करते थे और वह जल्द से जल्द गीता को अपना बनाना चाहते थे।

- रेनू तिवारी

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