By एकता | May 15, 2026
हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को शनि जयंती मनाई जाती है। इस साल 16 मई को शनि जयंती मनाई जाएगी। इसे 'शनि अमावस्या' भी कहते हैं क्योंकि यह दिन न्याय के देवता शनिदेव के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनि जयंती के दिन की गई पूजा और दान से शनिदेव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। अगर कोई व्यक्ति शनि दोष या उनकी दशा साढ़ेसाती और ढैय्या से परेशान है, तो इस दिन किए गए उपायों से उसे काफी राहत मिलती है।
काले तिल और उड़द: पुराने रोगों से छुटकारा पाने के लिए काले तिल और आर्थिक तंगी दूर करने के लिए काली उड़द की दाल का दान करें।
छाया दान: एक कटोरी में सरसों का तेल भरकर उसमें अपना चेहरा देखें और फिर उस तेल को शनि मंदिर या किसी जरूरतमंद को दे दें।
कंबल और जूते: जरूरतमंदों को जूते या कंबल का दान करना शुभ फलदायी होता है, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी साढ़ेसाती चल रही है।
लोहे का दान: लोहे की वस्तुओं का दान किया जा सकता है, लेकिन ध्यान रखें कि लोहे का सामान शनिवार को न खरीदें, उसे पहले ही खरीदकर रख लें।
अन्न दान: शास्त्रों में अन्न दान को महादान माना गया है। इस दिन सात अलग-अलग अनाज (सप्तधान्य) का दान करना या भूखों को भोजन कराना बहुत पुण्य देता है।
दान का पूरा फल तभी मिलता है जब उसे सही तरीके से किया जाए। सबसे पहले स्नान करके शनि मंदिर जाएं और शनिदेव के दर्शन करें। हाथ में थोड़ा जल लेकर संकल्प लें कि आप यह दान पूरी श्रद्धा से कर रहे हैं। मंदिर में दीपक जलाएं और 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें। याद रखें कि शनि अमावस्या का दान सूर्यास्त के बाद करना सबसे उत्तम माना जाता है।