By नीरज कुमार दुबे | May 14, 2025
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल की पहली वर्षगाँठ जल्द ही आने वाली है। इससे पहले सुगबुगाहट इस बात की है कि केंद्र में सत्तारुढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सियासी ताकत बढ़ने वाली है। हम आपको बता दें कि ऐसी चर्चाएं हैं कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों धड़ों का विलय होने वाला है और चाचा शरद पवार तथा भतीजे अजित पवार साथ आने वाले हैं। इसी तरह पंजाब में शिरोमणि अकाली दल बादल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल भी अपने लाव-लश्कर के साथ एनडीए के साथ फिर से जुड़ने वाले हैं।
दूसरी ओर पंजाब की बात करें तो आपको बता दें कि शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने सीमा पार ‘‘शांति के दुश्मनों’’ से निपटने में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मजबूत और स्पष्ट दृष्टिकोण की सराहना की है। शिअद प्रमुख ने एक बयान में स्थिति को कूटनीतिक तरीके से संभालने के लिए मोदी की प्रशंसा की, जिसके चलते पाकिस्तानी सेना को ‘‘संघर्षविराम की भीख मांगने के लिए वाशिंगटन भागना पड़ा’’। बादल ने कहा, “युद्ध के मैदान में निर्णायक जीत के बाद, प्रधानमंत्री ने शत्रुता समाप्त करने के उनके अनुरोध को स्वीकार करके एक राजनेता की तरह काम किया। जीत के बाद शांति सबसे सम्मानजनक रास्ता है।” हम आपको याद दिला दें कि शिरोमणि अकाली दल पहले भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का घटक दल था लेकिन तीन कृषि कानूनों के विरोध में उसने एनडीए से नाता तोड़ लिया था। हम आपको यह भी बता दें कि पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। हाल ही में फिर से शिरोमणि अकाली दल बादल का अध्यक्ष बनने के बाद सुखबीर बादल फिर से अपनी पार्टी को खड़ा करना चाहते हैं और इसलिए अपने पुराने सहयोगियों के साथ वापस आने के मार्ग तलाश रहे हैं।