उद्धव ने लिया था औरंगाबाद का नाम बदले जाने का फैसला, अब शरद पवार ने कहा- यह MVA के एजेंडे में नहीं था

By अंकित सिंह | Jul 12, 2022

महाराष्ट्र में राजनीतिक उठापटक के बाद उद्धव ठाकरे की कुर्सी जा चुकी है। कभी उद्धव ठाकरे के करीब रहे एकनाथ शिंदे उनसे बगावत करने के बाद मुख्यमंत्री भी बन चुके हैं। जब उद्धव ठाकरे की सरकार संकट में थी तो उनकी ओर से एक कैबिनेट मीटिंग बुलाई गई थी। इस मीटिंग में कई बड़े और अहम फैसले भी हुए थे जिसमें औरंगाबाद और उस्मानाबाद जिलों के नाम बदलने की भी बात कही गई थी। अब जब किसी को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति के भीष्म पितामह और एनसीपी प्रमुख शरद पवार से सवाल पूछा गया तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह हमारे सरकार के एजेंडे में नहीं था। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि यह मुद्दा एमवीए के न्यूनतम साझा कार्यक्रम में शामिल नहीं था और फैसला लिए जाने के बाद ही उन्हें इसकी जानकारी मिली। 

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2024 में चुनाव साथ मिलकर लड़ना चाहिए: पवार

वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार ने कहा कि वह महसूस करते हैं कि महा विकास आघाडी (एमवीए) के तीनों घटकों शिवसेना, कांग्रेस, राकांपा को वर्ष 2024 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ना चाहिए। हालांकि, पवार ने कहा कि इस मुद्दे पर फैसला पार्टी और गठबंधन में शामिल घटकों के साथ बातचीत कर के ही लिया जाएगा। गोवा में कुछ कांग्रेस विधायकों के पाला बदलकर सत्तारूढ़ भाजपा में शामिल होने को लेकर लगाए जा रहे कयासों पर पवार ने कहा कि कैसे कोई भूल सकता है जो कर्नाटक, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में हुआ। उन्होंने कहा कि मेरी राय है कि गोवा में ऐसा होने में समय लगेगा।

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