Share Market Crash: सेंसेक्स 2500 अंक टूटा, चंद घंटों में डूबे Investors के अरबों रुपये

By Ankit Jaiswal | Mar 09, 2026

शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य बात मानी जाती है, लेकिन सोमवार को कारोबार की शुरुआत में ही भारतीय बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसका असर बाजार की चाल पर साफ नजर आया।

बता दें कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार ब्रेंट तेल की कीमत एक सौ पंद्रह डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई, जिससे तेल आयात करने वाले देशों के लिए नई चुनौती खड़ी हो सकती है।

गौरतलब है कि भारत दुनिया के बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है। ऐसे में अगर मध्य पूर्व में संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है और तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका असर अर्थव्यवस्था और बाजार दोनों पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने की आशंका भी रहती है। चाहे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाई जाए या नहीं, इसका दबाव अर्थव्यवस्था पर किसी न किसी रूप में जरूर पड़ता है।

कारोबार की शुरुआत में लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली है। हालांकि कुछ कंपनियों के शेयरों में गिरावट सीमित रही है, जबकि कई कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई है।

मौजूद आंकड़ों के अनुसार बैंकिंग और धातु क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला है। इसके अलावा वाहन, निजी बैंक, सार्वजनिक बैंक और रियल एस्टेट से जुड़े शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई।

इस दौरान बाजार में अस्थिरता भी तेजी से बढ़ी है। निवेशकों की चिंता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बाजार में जोखिम को मापने वाला अस्थिरता सूचकांक भी काफी तेजी से ऊपर गया।

छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव देखा गया है। इन श्रेणियों के कई सूचकांकों में तीन प्रतिशत से ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।

हालांकि विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इतिहास बताता है कि भू-राजनीतिक घटनाओं का असर बाजार पर लंबे समय तक नहीं रहता। ऐसे हालात में निवेशकों को घबराने के बजाय धैर्य के साथ बाजार की दिशा पर नजर बनाए रखनी चाहिए।

विश्लेषकों के अनुसार घरेलू खपत से जुड़े कुछ क्षेत्रों पर इस संकट का असर सीमित रह सकता है। बैंकिंग, वाहन, दूरसंचार और सीमेंट जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक निवेश के अवसर बने रह सकते हैं। इसके अलावा रक्षा और दवा क्षेत्र को अपेक्षाकृत मजबूत माना जा रहा है।

फिलहाल बाजार की दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि मध्य पूर्व में चल रहा संघर्ष कितने समय तक जारी रहता है और वैश्विक तेल बाजार में कीमतों की चाल कैसी रहती है।

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