Shashi Tharoor : कुशल राजनयिक से लेकर लोकप्रिय राजनेता बनने तक का सफर

By Prabhasakshi News Desk | Jun 04, 2024

तिरुवनंतपुरम । संयुक्त राष्ट्र के पूर्व राजनयिक के रूप में काम करने से लेकर राजनीतिक गलियारे तक के सफर में कांग्रेस नेता शशि थरूर ने अपने बेबाक भाषणों, अपने अंग्रेजी ज्ञान, राजनीतिक सक्रियता तथा अपनी लिखी कई पुस्तकों से सोशल मीडिया समेत हर जगह जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की है। थरूर (58) ने 2009 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा था और इस लोकसभा चुनाव में जीत के साथ वह लगातार चौथे कार्यकाल में लोकसभा में केरल की तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करने जा रहे हैं। वर्तमान आम चुनाव में उन्होंने भाजपा के राजीव चंद्रशेखर के साथ कांटे की टक्कर में उन्हें 16 हजार से अधिक मतों से शिकस्त दी। 

थरूर ने तब ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक विशेष साक्षात्कार में पार्टी के भीतर निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव कराने की वकालत की थी। वर्ष 1956 में लंदन में जन्मे थरूर ने दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक किया था। वह सेंट स्टीफंस कॉलेज के छात्र संघ के अध्यक्ष भी थे। उन्होंने अमेरिका के मेडफोर्ड स्थित फ्लेचर स्कूल ऑफ लॉ एंड डिप्लोमेसी से स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करने के बाद 1978 में वहां से पीएचडी की डिग्री हासिल की। थरूर ने संयुक्त राष्ट्र में एक सफल राजनयिक के रूप में पहचान बनाई। संयुक्त राष्ट्र में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने शीत युद्ध के बाद शांति बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई और महासचिव के वरिष्ठ सलाहकार के अलावा संचार और सार्वजनिक सूचना के लिए अवर-महासचिव के रूप में सेवाएं दीं। वर्ष 2006 में थरूर को संयुक्त राष्ट्र के महासचिव पद के लिए हुए चुनाव में भारत के आधिकारिक उम्मीदवार के रूप में चुना गया था। 

इस चुनाव में दक्षिण कोरियाई राजनयिक बान की मून ने जीत दर्ज की थी और थरूर कुल सात उम्मीदवारों में दूसरे स्थान पर रहे थे। बड़ी बाधाओं से विचलित हुए बिना कड़ी लड़ाई लड़ने का 58 वर्षीय थरूर का जज्बा पहली बार इसी चुनाव में प्रदर्शित हुआ था। तीन साल बाद वह अंतरराष्ट्रीय सिविल सेवक के रूप में सेवानिवृत्त हुए और 2009 में सक्रिय राजनीति में कदम रखते हुए कांग्रेस के टिकट पर पहली बार तिरुवनंतपुरम से सांसद चुने गए। थरूर का सियासी सफर भले ही 53 साल की उम्र में शुरू हुआ था, लेकिन लोकसभा चुनाव जीतने के बाद उन्होंने एक राजनीतिक नेता के रूप में लंबी छलांग लगाई। उन्हें कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार में केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री नियुक्त किया गया था। थरूर राजनीतिक चर्चाओं के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने की कला में माहिर हैं। साल 2013 तक वह ट्विटर पर भारत के सबसे ज्यादा फॉलो किए जाने वाले नेता थे। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर सबसे ज्यादा फॉलो किए जाने वाले नेता के रूप में थरूर की जगह ले ली थी। 

थरूर एक मुखर नेता के रूप में पहचाने जाते हैं, जो अक्सर अपनी राजनीतिक गतिविधियों और अंग्रेजी में ऐसे शब्दों के इस्तेमाल के कारण सुर्खियों में रहते हैं, जिसका अर्थ समझने के लिए शब्दकोश का सहारा लेना पड़ता है। वह गाहे-बगाहे विवादों से भी घिरे रहे हैं। मिसाल के तौर पर 2009 में अपने राजनीतिक करियर के शुरुआती दिनों में थरूर ने हवाई यात्रा के संबंध में ‘कैटल क्लास’ संबंधी टिप्पणी की थी, जिसके लिए उन्हें माफी भी मांगनी पड़ी थी। थरूर पर मंत्री पद पर रहते हुए केरल के कोच्चि शहर की एक क्रिकेट टीम में संदिग्ध दिलचस्पी रखने का आरोप भी लगाया गया था। उन्होंने अप्रैल 2010 में केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। जुलाई 2020 में थरूर के खाते में तिरुवनंतपुरम लोकसभा क्षेत्र का सबसे लंबे समय तक प्रतिनिधित्व करने का रिकॉर्ड जुड़ गया। उन्होंने कांग्रेस के ए चार्ल्स का रिकॉर्ड तोड़ते हुए यह उपलब्धि हासिल की, जिन्होंने 1984 से 1991 के बीच 4,047 दिन तिरुवनंतपुरम लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था। थरूर एक प्रतिष्ठित लेखक भी हैं। उन्होंने ‘द ग्रेट इंडियन नॉवेल’, ‘एन एरा ऑफ डार्कनेस’, ‘व्हाई आई एम अ हिंदू’, ‘भारत: फ्रॉम मिडनाइट टू द मिलेनियम’ और ‘द पैराडॉक्सिकल प्राइम मिनिस्टर’ सहित लगभग 23 लोकप्रिय किताबें लिखी हैं।

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