By अभिनय आकाश | Jun 18, 2026
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बुधवार को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू द्वारा केंद्र के प्रस्तावित परिसीमन ढांचे के बचाव पर एक 'विचार-प्रयोग' (thought experiment) के ज़रिए अपनी असहमति जताई। उन्होंने तर्क दिया कि अगर सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या में एक समान बढ़ोतरी की जाती है, तब भी राजनीतिक प्रभाव बड़े राज्यों की ओर ही झुका रहेगा। थरूर की यह प्रतिक्रिया नायडू के उस बयान के बाद आई है, जिसमें नायडू ने संसद में संविधान संशोधन विधेयक को रोकने के लिए विपक्ष की आलोचना की थी और कहा था कि परिसीमन को लेकर जताई जा रही चिंताएं बेबुनियाद हैं। अप्रैल में संसद के विशेष सत्र के दौरान पेश किए गए संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 में लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने और परिसीमन को 2011 की जनगणना से जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया था। इसमें सभी राज्यों के लिए लोकसभा सीटों की संख्या को आनुपातिक रूप से 50% तक बढ़ाने का प्रस्ताव भी शामिल था।
एक उदाहरण देते हुए उन्होंने पूछा कि क्या सच में कोई फर्क नहीं पड़ेगा अगर उत्तर प्रदेश के सांसदों की संख्या 80 से बढ़कर 120 हो जाए और केरल के सांसदों की संख्या 20 से बढ़कर 30 हो जाए? उन्होंने कहा कि भले ही संख्या का अनुपात एक जैसा रहे, लेकिन राजनीतिक वजन में भारी अंतर एक गंभीर चिंता का विषय बना रहेगा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक वजन में भारी अंतर केरल के 10 और सांसदों के मुकाबले यूपी के 90 और सांसद। क्या यह आपके लिए बिल्कुल भी चिंता की बात नहीं है? इस उदाहरण के ज़रिए थरूर ने तर्क दिया कि सभी राज्यों में सीटों की संख्या में आनुपातिक बढ़ोतरी करने से राजनीतिक संतुलन बना रहेगा, ऐसा ज़रूरी नहीं है। खासकर दक्षिणी राज्यों के लिए, जिन्होंने लंबे समय से आबादी पर आधारित परिसीमन प्रक्रिया में नुकसान होने की चिंता जताई है।