By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 21, 2026
कांग्रेस नेता और केरल के तिरुवंनतपुरम से लोकसभा सदस्य शशि थरूर ने बृहस्पतिवार को नये संसद भवन को ‘भावशून्य सम्मेलन केंद्र’ करार देते हुए कहा कि इसमें अपनेपन की कमी महसूस होती है तथा ये दूरियां हमारी राजनीति के ध्रुवीकरण को दर्शाती हैं। थरूर ने पत्रकार और लेखिका शोभना के. नायर की नयी किताब ‘हाउसिंग द रिपब्लिक: अ बायोग्राफी ऑफ द इंडियन पार्लियामेंट’ के विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘राष्ट्रीय राजधानी पर अपनी भौतिक छाप छोड़ने की एक खास इच्छा रही है’’, लेकिन साथ ही दलील दी कि सभी बदलाव जरूरी नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ नया संसद भवन वास्तव में एक भावशून्य सम्मेलन केंद्र जैसा प्रतीत होता है, और इसके कई कारण हैं... इसकी छत बहुत ऊंची है, जिससे आपसी जुड़ाव या आत्मीयता की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाती है।
यह भवन सरकार के महत्वाकांक्षी ‘सेंट्रल विस्टा कॉम्प्लेक्स’ का हिस्सा है, जिसकी परिकल्पना औपनिवेशिक दौर की सरकारी इमारतों की जगह लेने के लिए की गई। थरूर (70) ने नये संसद भवन के डिजाइन की आलोचना करते हुए कहा कि इससे अनौपचारिक बातचीत और अलग-अलग पार्टियों के बीच का वह आपसी तालमेल कम हो गया है, जो कभी संसद की पहचान हुआ करता था, विशेषकर सेंट्रल हॉल न होने की वजह से। उन्होंने कहा, ‘‘इस जगह का भावशून्य होना, अपनापन न होना, संवाद को बढ़ावा न मिलना, और किसी ऐसे सेंट्रल हॉल का न होना जहां मौजूदा और पूर्व सांसद, पर्यवेक्षक और पुराने समय के मीडियाकर्मी आपस में अनौपचारिक बातचीत कर सकें, ये सभी बातें पार्टियों के बीच आपसी मेलजोल और दोस्ताना माहौल की कमी को दिखाती हैं, जो आज की संसद की एक खास पहचान बन गई है।’’ कांग्रेस नेता ने लोकसभा में सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 850 करने के प्रस्ताव को लेकर कड़ी चेतावनी दी।
उन्होंने दलील दी कि भले ही निचले सदन में इसके लिए ‘जगह’ मौजूद हो, लेकिन इस कदम से ‘सार्थक संसदीय चर्चा और विचार-विमर्श की भावना’ समाप्त हो जाएगी। उन्होंने आलोचनात्मक तुलना करते हुए कहा कि सांसद ‘अजनबियों की भीड़’ बनकर रह सकते हैं, जो ‘‘चाइनीज पीपुल्स कंसल्टेटिव कांग्रेस की तरह, महान नेता के ऐलान करने पर एक साथ तालियां बजाते हुए रस्मी तौर पर मेजें थपथपाएंगे।’’ थरूर ने कहा, ‘‘अगर यही उद्देश्य है, तो संसद की जरूरत के बारे में हम सभी ने जो समझा था, यह असल में अब वैसा नहीं रहेगा।’’ थरूर ने इसके बावजूद नए संसद भवन की तारीफ करते हुए कहा कि इसने पुरानी बैठक व्यवस्था की ‘दिक्कत’ को खत्म कर दिया है, जहां सदस्यों को ‘सिकुड़कर बैठना’ पड़ता था और गलियारे तक पहुंचने के लिए सचमुच अपने साथियों के घुटनों के बीच से निकलना पड़ता था लेकिन अब ‘वह दिक्कत अब खत्म हो गई है।’ कार्यक्रम में मौजूद राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास ने भी नए संसद भवन की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसकी बनावट को पूरी तरह से खारिज कर दिया और कहा कि उन्हें ‘इसकी कोई भी चीज़’ पसंद नहीं है।