By नीरज कुमार दुबे | Aug 06, 2026
क्या बांग्लादेश में लोकतांत्रिक असहमति के लिए जगह बची है? यह सवाल तब फिर चर्चा में आ गया, जब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के वर्चुअल कार्यक्रम में शामिल होने वाले पूर्व क्रिकेटर और अवामी लीग के नेता शाकिब अल हसन के घर पर हमला किया गया। क्या बांग्लादेश में मीडिया स्वतंत्र है? यह सवाल तब फिर चर्चा में आ गया जब बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार के फतवे का पालन करते हुए हर मीडिया संस्थान ने शेख हसीना के भाषण को अपने प्रकाशन या प्रसारण में कोई जगह नहीं दी।
जहां तक नई दिल्ली स्थित फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब में वर्चुअल माध्यम से शेख हसीना के संबोधन की बात है तो आपको बता दें कि उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी और गिरफ्तारी की आशंका से भयभीत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उनकी वापसी सत्ता हासिल करने के लिए नहीं, बल्कि बांग्लादेश को "सही रास्ते" पर लाने के लिए होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्हें जेल भी जाना पड़े तो भी वह अपने देश लौटेंगी। अपने संबोधन में हसीना ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बांग्लादेश में लोकतांत्रिक संस्थाओं की बहाली का समर्थन करने की अपील की और अवामी लीग पर लगा प्रतिबंध हटाने, राजनीतिक बंदियों की रिहाई, अभिव्यक्ति और मीडिया की स्वतंत्रता बहाल करने तथा न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने जैसी मांगें रखीं।
हसीना ने 2024 के "जुलाई विद्रोह" को स्वतःस्फूर्त छात्र आंदोलन नहीं, बल्कि एक सुनियोजित सत्ता परिवर्तन अभियान बताया। उन्होंने दावा किया कि तत्कालीन अंतरिम प्रशासन के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के पुराने बयानों से भी इस दिशा में संकेत मिलते हैं।
इसी कार्यक्रम में हसीना के पुत्र और अवामी लीग के वरिष्ठ नेता सजीब वाजेद जॉय ने भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि बांग्लादेश एक "विफल राष्ट्र" बनने की ओर बढ़ रहा है और यदि मौजूदा हालात जारी रहे तो भविष्य में यह क्षेत्रीय और वैश्विक आतंकवाद का बड़ा केंद्र बन सकता है। जॉय ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की आईएसआई को बांग्लादेश में खुली छूट मिल गई है, अवामी लीग सरकार के दौरान गिरफ्तार किए गए सैकड़ों दोषी आतंकियों को रिहा कर दिया गया है, प्रतिबंधित संगठन खुलेआम मार्च कर रहे हैं और अल-कायदा से जुड़े लोगों को सार्वजनिक मंच मिल रहे हैं। उन्होंने भारत के लिए भी इसे सुरक्षा चुनौती बताया और भारतीय मीडिया से इस विषय को लगातार उठाने की अपील की।
जॉय ने यह भी आरोप लगाया कि अवामी लीग को राजनीतिक प्रक्रिया से बाहर रखा गया है, हजारों कार्यकर्ताओं और समर्थकों को लंबे समय से बिना मुकदमे या जमानत के हिरासत में रखा गया है, जबकि पार्टी से सहानुभूति रखने वाले पत्रकारों और मीडिया संस्थानों पर भी कार्रवाई हुई है। उन्होंने यह दावा भी किया कि उनके कार्यक्रम से पहले भारतीय मीडिया संस्थानों तक दबाव बनाने की कोशिश की गई।
उधर, शेख हसीना के संबोधन के कुछ ही घंटों बाद पूर्व बांग्लादेश क्रिकेट कप्तान और अवामी लीग के पूर्व सांसद शाकिब अल हसन के मगुरा स्थित घर पर हमला हुआ। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मोटरसाइकिलों पर पहुंचे कुछ लोगों ने घर के मुख्य गेट पर पेट्रोल बम जैसी वस्तु फेंकी, जिससे आग लगी, लेकिन पड़ोसियों ने समय रहते आग बुझा दी। पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है और कहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि इस्तेमाल की गई वस्तु वास्तव में पेट्रोल बम थी या कुछ और। घटना के समय घर में कोई मौजूद नहीं था।
यह हमला ऐसे समय हुआ जब शाकिब अल हसन शेख हसीना के वर्चुअल कार्यक्रम में दिखाई दिए थे। इसी कारण अवामी लीग समर्थक इस घटना को राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़ रहे हैं। हालांकि जांच एजेंसियों ने अभी तक हमले के पीछे किसी राजनीतिक उद्देश्य की पुष्टि नहीं की है।
दूसरी ओर, बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने शेख हसीना को "फरार दोषी" बताते हुए उनके कार्यक्रम पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि भारत में इस कार्यक्रम के आयोजन से दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ सकता है। हालांकि भारत ने स्पष्ट किया है कि नई दिल्ली में आयोजित यह कार्यक्रम पूरी तरह निजी था और भारत सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं था, फिर भी ढाका ने इसे द्विपक्षीय संबंधों के लिए नुकसानदायक बताया है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि भारत को पहले ही इस कार्यक्रम के संभावित कूटनीतिक प्रभावों से अवगत करा दिया गया था, इसके बावजूद शेख हसीना को भारतीय धरती से मीडिया को संबोधित करने की अनुमति देना बांग्लादेश की जनता की भावनाओं को आहत करने वाला कदम है। मंत्रालय ने शेख हसीना के बयानों को जुलाई-अगस्त 2024 की घटनाओं पर संयुक्त राष्ट्र के निष्कर्षों को नकारने का प्रयास बताते हुए इसे बांग्लादेश की संप्रभुता और 'जुलाई क्रांति' के शहीदों का अपमान करार दिया। साथ ही ढाका ने एक बार फिर 2013 की भारत-बांग्लादेश प्रत्यर्पण संधि के तहत शेख हसीना के प्रत्यर्पण की अपनी मांग दोहराई, जबकि भारत ने दोहराया कि यह कार्यक्रम फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया द्वारा आयोजित निजी आयोजन था और सरकार ने न तो इसका आयोजन किया और न ही इसका समर्थन किया।
बहरहाल, इन घटनाओं ने बांग्लादेश के राजनीतिक माहौल, विपक्ष की भूमिका, मीडिया की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति तथा भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर अवामी लीग मौजूदा व्यवस्था पर राजनीतिक दमन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में कमी और लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन के आरोप लगा रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार शेख हसीना और उनके सहयोगियों के खिलाफ सख्त रुख बनाए हुए है और उससे जुड़े लोग खुलेआम चेतावनी दे रहे हैं कि शेख हसीना को बांग्लादेश लौटने पर फांसी पर चढ़ा दिया जायेगा। ऐसे में शेख हसीना की दिसंबर में प्रस्तावित वापसी और उसके बाद की राजनीतिक परिस्थितियों पर पूरे क्षेत्र की नजर बनी रहेगी।