मुश्किलों में शिव प्रताप शुक्ला ने संयम के साथ पार्टी को शिखर तक पहुंचाया, जानें राज्यसभा सांसद की शख्सियत की ये बड़ी बातें

By रेनू तिवारी | Apr 01, 2022

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव हो चुके हैं और योगी सरकार को पूर्ण बहुमत देकर एक बार फिर से जनता ने चुना हैं। शपथ ग्रहण के साथ पूरी केबिनेट भी बनकर तैयार है। जीत के पहले योगी सरकार पर कई गंभीर आरोप लगे थे जिसमें से एक आरोप यह था कि यूपी में योगी सरकार से ब्राह्मण नाराज है क्योंकि सरकार ने उन्हें काफी अनदेखा किया है। ब्राह्मणों की नाराजगी दूर करने के लिए भाजपा ने उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण कमिटी बनाई और इस कमेटी के अध्यक्ष शिव प्रताप शुक्ला बनाए गए हैं। शिव प्रताप शुक्ला भाजपा से राज्यसभा सांसद हैं। शिव प्रताप शुक्ला और योगी आदित्यनाथ भले की एक ही पार्टी का हिस्सा रहे हों लेकिन शिव प्रताप शुक्ला को योगी का कट्टर विरोधी माना जाता है। ऐसे में पार्टी की तरफ से शिव प्रताप शुक्ला को ये बड़ी जिम्मेदारी देकर कमेटी का अध्यक्ष बनाया जाने के पीछे भाजपा की यह रणनीति थी कि ब्राह्मणों की एक बार फिर से नाराजगी को दूर किया जा सके। शिव प्रताप शुक्ला भले ही योगी को ना पसंद करते हों लेकिन उन्होंने खुलकर कभी ये बात जाहिर नहीं की और पार्टी के बीच तालमेल बनाये रखा लेकिन राजनीतिक पंडितों की मानें तो योगी और शिव प्रताप शुक्ला के बीच 36 का आंकड़ा रहा हैं।

एबीवीपी से भारतीय जनता पार्टी का सफर

शिव प्रताप शुक्ला ने 1989 में आम चुनावों में प्रचार किया और कांग्रेस के सुनील शास्त्री को हराकर उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य चुने गए। वे 1989, 1991, 1993 और 1996 में लगातार चार बार विधान सभा के सदस्य के रूप में चुने गए।

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भाजपा सरकार में राज्य मंत्री

शिव प्रताप शुक्ला को उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकारों में राज्य मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्हें भारतीय जनता पार्टी-बहुजन समाज पार्टी के तहत 1996-1998 में जेलों के लिए कैबिनेट मंत्री नियुक्त किया गया था, जो मायावती और कल्याण सिंह की अल्पकालिक गठबंधन सरकार थी और वर्ष 1998-2002 में राजनाथ सिंह की भाजपा सरकार के तहत बाद में ग्रामीण विकास मंत्री नियुक्त किया गया था।

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