भतीजे अखिलेश को चाचा शिवपाल का जवाब- मैं तो सदैव स्वतंत्र था, सिद्धांतों और सम्मान से समझौता अस्वीकार्य

By अंकित सिंह | Jul 23, 2022

उत्तर प्रदेश की राजनीति में आज अखिलेश यादव को लेकर हलचल तेज है। उत्तर प्रदेश चुनाव 2022 से पहले तमाम कड़वाहटों को भुलाकर अखिलेश यादव और शिवपाल यादव एक फ्रेम में आए थे। दोनों ने गठबंधन कर चुनाव लड़ा था। उस दौरान शिवपाल यादव ने कहा था कि सारे गिले-शिकवे दूर हो गए हैं। इन सबके बीच चुनावी नतीजों के बाद एक बार फिर से दोनों के बीच सियासी तल्खी लगातार बढ़ती गई। अक्सर शिवपाल यादव अखिलेश यादव को लेकर नाराजगी व्यक्त करते रहे। शिवपाल और अखिलेश यादव की नाराजगी उस वक्त मीडिया की सुर्खियों में आ गई जब समाजवादी पार्टी के विधायकों के बैठक में शिवपाल यादव को नहीं बुलाए गए। आपको बता दें कि शिवपाल यादव समाजवादी पार्टी के ही टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं।

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माना जा रहा है कि हाल में संपन्न राष्ट्रपति चुनाव में राजभर और शिवपाल द्वारा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का समर्थन किए जाने के बाद सपा ने यह कदम उठाया है। सपा के इस फैसले को लेकर उसपर निशाना साधते हुए उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है, ‘‘सपा अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी आप पिछड़े वर्ग के किसी भी नेता के बढ़ते कद को बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं। मौर्य ने अपने ट्वीट में यादव पर आरोप लगाया है, ‘‘आप चाहते हैं, ओबीसी का कोई दूसरा बड़ा नेता न हो, आप पिछड़ों के विरोधी हैं। जब आप सीएम थे तब ओबीसी के किस नेता को डिप्टी सीएम बनाया? उन्होंने दावा किया कि पिछड़ों का विश्वास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ है।

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