अखिलेश लोकसभा नहीं पहुँच सकें, इसकी पूरी तैयारी करने में जुटे हैं शिवपाल

By अजय कुमार | Sep 22, 2018

समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के अध्यक्ष शिवपाल यादव अपने भतीजे और सपा प्रमुख अखिलेश यादव को जरा भी छूट देने को तैयार नहीं हैं। लोकसभा चुनाव में एक तरफ शिवपाल ने भाई मुलायम सिंह यादव के खिलाफ कोई भी प्रत्याशी नहीं उतारने की बात कही है, वहीं अखिलेश की लोकसभा की राह मुश्किल करने के लिये चाचा शिवपाल यादव ने अखिलेश के खिलाफ मुस्लिम प्रत्याशी उतारने की बात कह कर सपा नेताओं के दिलों की धड़कन बढ़ा दी है। वैसे अभी यह तय नहीं है कि अखिलेश चुनाव लड़ेंगे भी या नहीं। कुल मिलाकर लोकसभा चुनाव में सेक्युलर मोर्चा उत्तर प्रदेश की सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगा। कन्नौज सीट (जहां से अखिलेश के चुनाव लड़ने की चर्चा है) में उनकी पार्टी का प्रत्याशी मुस्लिम होगा। यहां से वर्तमान में अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव सांसद हैं जो आगे चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा कर चुकी हैं।

शिवपाल की तेजी का आलम यह है कि मुलायम कुनबे से भी उनके पक्ष में विचार आने लगे हैं। मैनपुरी से सपा से सांसद तेज प्रताप सिंह यादव का यह कहना मायने रखता है कि सेक्युलर समाजवादी मोर्चा के गठन से समाजवादी पार्टी को नुकसान होगा। भले ही तेज प्रताप को शिवपाल से खतरा नजर आ रहा हो, लेकिन पूरी समाजवादी पार्टी की सोच ऐसी नहीं है। सपा के कई नेता जो शिवपाल के सामने मुंह नहीं खोल पाते थे, अब वह ही अखिलेश के इशारे पर चाचा की इज्जत उतारने में लगे हैं। इस बात का अहसास तब हुआ जब अखिलेश के करीबी पूर्व राज्य मंत्री पवन पांडेय ने फैजाबाद में शिवपाल को भाजपा का एजेंट तक कह डाला।

सपा नेता पवन के हमले का जवाब सेक्युलर मोर्चा के प्रवक्ता अभिषेक सिंह और दीपक मिश्र ने लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर दिया और कहा कि सपा के शीर्ष नेतृत्व के इशारे पर शिवपाल की छवि खराब करने के प्रयास किए जा रहे हैं। फैजाबाद में शिवपाल के समर्थन में उमड़ी भीड़ देख पवन पांडेय ने हताशा में उन पर आरोप लगाए। आश्चर्य की बात है कि भ्रष्टाचार के आरोप जिस व्यक्ति के जरिये लगाए जा रहे हैं, वह खुद भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त हो चुके हैं और अखिलेश ने ही उन्हें बर्खास्त किया था।

समाजवादी चिंतन सभा के अध्यक्ष दीपक मिश्र ने कहा कि समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के अब सपा से रास्ते अलग हैं। इसका गठन मुलायम सिंह यादव के आशीर्वाद से किया गया है। शिवपाल पहले भी मुलायम के सहज राजनीतिक उत्तराधिकारी माने जाते रहे हैं। यही वजह है कि युवाओं का समूह उनके साथ खुलकर है। बहरहाल, पवन पांडेय के उक्त बयान से मोर्चा नेताओं को कोई खास हैरानी नहीं हुई है, इसकी वजह भी है। आज जैसी भाषा पवन पांडेय बोल रहे हैं। ऐसी ही भाषा पूर्व में सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी चाचा शिवपाल के लिये प्रयोग कर चुके हैं। जब उन्होंने सेक्युलर मोर्चा के गठन पर कहा था कि यह सब बीजेपी की साजिश से हो रहा है।

-अजय कुमार

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