Gyan Ganga: श्रीराम ने दर्शाया- विकट घड़ी में कैसे लोगों का संग अनिवार्य होना चाहिए

By सुखी भारती | Mar 28, 2023

रोम की एक कहावत है, कि ‘रोम जब जल रहा था, तो नीरो बाँसुरी बजा रहा था।’ यह कहावत तब अस्तित्व में आई, जब रोम पर शत्रु सेना के आक्रमण होने के बाद भी, वहाँ का राजा अपने महलों में विषय राग-रंग में मदमस्त था। ठीक यही स्थिति रावण की भी है। उसे इतना तो ज्ञान है ही, कि उसके संहारक श्रीराम जी उसके द्वार पर आन बैठे हैं। ऐसे में युद्ध की रणनीतियां तैयार करने की बजाय, उसे अपने रंग-महल में रंगरलियाँ मनाते हुए कहाँ उचित ठहराया जा सकता है? लेकिन रावण तो रावण है। वह भला दिशावान कैसे हो सकता था? उसे तो उल्टा जो चलना था।

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इसके पश्चात श्रीराम जी ने अपना सीस सुग्रीव की गोद में टेक रखा है। वह महाबली सुग्रीव, जिसकी बाहों में हजारों हाथियों का बल है। प्रभु श्रीराम जी के साथ कौन-कौन हैं, व किस सेवा में कार्यरत हैं, इसका बड़ा सुंदर वर्णन श्रीराम चरितमानस में है-

‘प्रभु कृत सीस कपीस उछंगा।

बाम दहिन दिसि चाप निषंगा।।

दुहुँ कर कमल सुधारत बाना।

कह लंकेस मंत्र लगि काना।।

बड़भागी अंगद हनुमाना।

चरन कमल चापत बिधि नाना।।

प्रभु पाछें लछिमन बीरासन।

कटि निषंग कर बान सरासन।।’

अर्थात प्रभु श्रीराम जी ने अपना सीस वानरराज सुग्रीव की गोद में रखा हुआ है। उनकी बायीं ओर धनुष तथा दाहिनी ओर तरकश रखा है। ऐसे में भी वे अपने दोनों कर कमलों से बाण सुधार रहे हैं। बिल्कुल पास में ही श्रीविभीषण जी भी हैं। जो कि प्रभु के साथ बिल्कुल कोनों से लगकर कोई सलाह कर रहे हैं।

परम भाग्यशाली अंगद और श्रीहनुमान जी अनेकों प्रकार से, प्रभु श्रीराम जी के श्रीचरणों को दबा रहे हैं। श्रीलक्षमण जी कमर में धनुष-बाण लिए वीरासन से प्रभु के पीछे सुशोभित हैं। प्रभु के साथ उपस्थित इन समस्त महारथियों की पूरे धरा पटल पर धाक है। अंगद एवं श्रीहनुमान जी प्रभु के चरण कमलों को जीवन का आधार बना कर सेवा कर रहे हैं। जिसका परिणाम यह है, कि उनके भक्ति पथ पर पाँव अडिग जमे हुए हैं। श्रीविभीषण जी को भले ही संसार अज्ञानता वश सम्मान न दे, लेकिन श्रीराम जी सबसे अधिक उन्हें ही अपने कानों की निकट रख कर, उनकी बात को सुन रहे हैं।

भगवान श्रीराम जी ने यह तो दर्शा दिया, कि विकट घड़ी में कैसे लोगों का संग अनिवार्य होना चाहिए। लेकिन इसी प्रसंग में श्रीराम जी, चंद्रमा को एक टकाटक निहारते हुए, सबसे एक प्रश्न करते हैं। क्या था वह प्रश्न, व उसके आध्यात्मिक जीवन के लिए क्या संदेश व मायने थे, जानेंगे अगले अंक में---(क्रमशः)---जय श्रीराम।

-सुखी भारती

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