By अनन्या मिश्रा | Feb 24, 2026
सिंगापुर में एक खास तरह का वर्क वीजा दिया जाता है। जिसको एंट्रीपास कहा जाता है। इसको लोग स्टार्टअप वीजा के रूप में भी जानते हैं। यह स्टार्टअप वीजा को उन विदेशी वर्कर्स और आंत्रप्रेन्योर्स को दिया जाता है, तो सिंगापुर में अपना बिजनेस शुरू करना या फिर ऑपरेट करना चाहते हैं। इस योजना की शुरूआत इसलिए की गई है, जिससे कि मजबूत निवेश वाली कंपनियों और इनोवेटिव वेंचर को देश में भी लाया जा सके। इस योजना को शुरू करने का मकसद स्टार्टअप और टेक्नोलॉजी वाली कंपनियों का हब बनना है। जोकि यह वीजा पूरा करता है।
बता दें कि स्टार्टअप वीजा से जुड़े सभी तरह के प्रशासनिक कामों को देश की 'मिनिस्ट्री ऑफ मैनपॉवर' देखती है। यह एंट्रीपास उन फाउंडर्स और योग्य विदेशी वर्कर्स के लिए एक रास्ता है, जोकि सिंगापुर में अपना बिजनेस चलाना चाहते हैं। जिससे कि देश की अर्थव्यवस्था को गति मिल सके। ऐसे में इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस वीजा से जुड़ी सभी जरूरी डिटेल्स के बारे में बताने जा रहे हैं।
यह वीजा उन लोगों के लिए है, जो अपना बिजनेस सिंगापुर में शुरू करना चाहते हैं। इस वीजा के लिए सिर्फ वह लोग ही योग्य माने जाएंगे, जिनके स्टार्टअप्स को मान्यता प्राप्त वेंचर कैपिटल फर्मों से सर्पोट मिल रहा है। उन कंपनियों के मालिक जो मार्केट में इनोवेटिव चीजों को ला रहे हैं या फिर सरकारी मान्यता प्राप्त इनक्यूबेटर्स और एक्सेलेरेटर्स द्वारा समर्थित बिजनेस के मालिक हैं।
बता दें कि एंट्रीपास को एक तय समय सीमा के लिए जारी किया जाता है। जो एक से दो साल हो सकती है। अगर कंपनी MOM की शर्तों को मान रही हैं, तो वीजा रिन्यू किया जा सकता है। रिन्यूअल इस बात पर निर्भर करता है कि कंपनी की ऑपरेशनल एक्टिविटी क्या है। बिजनेस कितना पैसा खर्च कर रहा है और क्या स्थानीय लोगों के लिए यह जॉब पैदा कर रहा है या नहीं। जिनको वीजा रिन्यूअल कराना है, उनको वह सारे डॉक्यूमेंट दिखाने होंगे। जिससे कि यह साबित हो सके कि उनका बिजनेस एक्टिव है।
एंट्रीपास के लिए MOM के वर्क पास पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन जमा करना होगा। आवेदकों को जरूरी डॉक्यूमेंट देने होंगे, इन डॉक्यूमेंट्स में बिजनेस प्लान, वेंचर फंडिंग का सबूत या इनक्यूबेटर्स या एक्सेलेरेटर्स से मिला लेटर ऑफ सपोर्ट शामिल है। इन डॉक्यूमेंट्स को जमा करने के बाद आवेदन की स्थिति को डिजिटल रूप से ट्रैक किया जा सकता है। फिर आगे यह सरकार तय करेगी कि वीजा देना है या नहीं। आमतौर पर कुछ सप्ताह में वीजा मिल जाता है।