By नीरज कुमार दुबे | Feb 28, 2024
कर्नाटक में कांग्रेस उम्मीदवार की जीत पर पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाना और तमिलनाडु में द्रमुक की ओर से अपने विज्ञापन में चीनी झंडा लगाने की घटना सामने आने से राजनीति तो गर्माई ही है साथ ही देशवासियों का भी गुस्सा उबाल पर है। सवाल उठ रहा है कि इंडिया गठबंधन के दल आखिर पाकिस्तान और चीन के मुरीद क्यों हुए जा रहे हैं? सवाल उठ रहा है कि आखिर कौन थे वह लोग जो भारत की संसद के लिए निर्वाचित व्यक्ति की जीत की खुशी में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे? सवाल उठ रहा है कि ये कौन लोग हैं जो खाते हिंदुस्तान का हैं मगर गाते पाकिस्तान का हैं? सवाल उठता है कि पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा लगाने वालों को जब पाकिस्तान चले जाने का सुझाव दिया जाता है तो कुछ राजनीतिक दल उनके बचाव में क्यों खड़े हो जाते हैं? देश की जनता जानना चाहती है कि आखिर कौन थे वो लोग जो पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाकर निकल गये और अब तक गिरफ्तार नहीं किये गये हैं?
जहां तक द्रमुक की ओर से विज्ञापन में चीनी झंडा लगाने की बात है तो यह सीधे-सीधे देश की संप्रभुता पर हमला है। वैसे यह पहली बार नहीं है जब द्रमुक की ओर से देश विरोधी बात की गयी हो। हम आपको बता दें कि इससे पहले द्रमुक के एक बड़े नेता ए राजा कह चुके हैं कि हमें अलग देश की मांग करने पर मजबूर नहीं किया जाये। इसके अलावा द्रमुक के एक सांसद संसद के भीतर ही उत्तर भारत पर गंभीर टिप्पणी कर विवाद खड़ा कर चुके हैं।
बहरहाल, यह सब दर्शाता है कि द्रमुक किस विचारधारा को लेकर आगे बढ़ रही है। देखा जाये तो कर्नाटक और तमिलनाडु की घटनाएं देशवासियों के लिए चेतावनी भी हैं कि यदि गलती से भी देश गलत हाथों में गया तो अलगावावादियों की भांति सोच रखने वाले तत्व हावी हो जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सही ही कहा है कि द्रमुक को सजा देने का समय आ गया है।