पानी का स्मार्टसिटी (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Jul 16, 2025

हम कोई छोटे मोटे बंदे नहीं हैं हम स्मार्ट सिटी के वासी हैं। आपको शायद पता न हो स्मार्ट सिटी सिर्फ हमारे देश में हैं। दूसरी चुस्त बातों का ज़िक्र आज छोड़ो, हमारी स्मार्ट सिटी में कमबख्त बादलों की गलती से एक बार तेज़ बारिश आ जाए तो हम उसके पानी का खुले दिल से स्वागत करते हैं। हम सड़कों को तालाब होने देते हैं ताकि गरमी में स्मार्ट और ठंडे अनुभव हों। जो अनुभव स्मार्ट सिटी में होते हैं वे छोटे मोटे गांव या शहर में नहीं हो सकते। बहुत दिनों बाद कई कई फुट पानी सड़क पर घूमता देखकर तबीयत पानी पानी हो जाती है। हम बताना नहीं चाहते, वास्तव में एक ज़ोरदार बारिश में हमारी सिटी की, सिट्टी पिट्टी गुम हो जाती है। 

हम काम से लदे, कार्ड्स से भरी ज़िंदगी में, कहीं भी भागते दौड़ते ही जा सकते हैं लेकिन अपने चुस्त शहर में स्वयं पधारी नदी में तो आराम से तैर भी सकते हैं। अपनी कार को भी ख़ास अनुभव दिला कर हिम्मत का इम्तहान भी दे सकते हैं। कुछ मिनट की यात्रा को कई घंटे में पूरी कर सहनशक्ति विकसित कर सकते हैं। यहां कार का हॉर्न बंद हो जाता है क्यूंकि पानी ने बैंड बजा दी होती है। हम ज्यादा सुविधाओं में रहने वालों को कुछ ही देर में पता चल जाता है कि वास्तविक ट्राफिक जाम, जल भराव और नाकाम प्रशासन क्या होता है । सीवर ओवर फ्लो, बढ़िया महंगी कार बंद हो जाने, करोड़ों के फ़्लैट में शाम की जगह देर रात को पहुंचने से, आम बेबस व्यक्ति जैसा महसूस करना, अपने आप में यादगार बन जाता है। और हां, इस दौरान हम विरले वीडियो भी बनाते हैं। 

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सड़क पर उफनती नदी में साइबर सिटी के प्रबंध हमें डूबने की प्रेरणा देते हैं। कुछ लोग ऑनलाइन बोट खरीदने की सोचने लगते हैं। ऐसा ज़बर्दस्त मौक़ा गांव में रहते हुए भी नहीं मिल सकता क्यूंकि  हर गांव में नदी नहीं होती। यह सौभाग्य हमारे स्मार्ट सिटी में है कि करोड़ों खर्च कर, आलीशान मकान खरीदकर, महंगा सामान सजाकर भी गरीब से गरीब लोगों जैसी जीवन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है। हमें आम लोगों के साथ ही, गंदे पानी में जाम में फंसे रहना पड़ता है। 

हम अपने स्मार्ट सिटी की तुलना आम विदेशी शहरों से नहीं कर सकते। वहां हर किसी को, किसी भी स्थिति में एक जैसे अनुभव होते हैं। यहां खूब पैसा कमाकर भी मज़ा नहीं आता। कुछ भी हो जी, ऐसे अनुभव इंसान में चुस्ती और जागरूकता तो भर ही देते हैं। हम, नगरपालिका को बुरा ही बुरा कह रहे होते हैं। कुछ ही देर में, छोटी छोटी कम सुविधाओं वाली कई जगहों को याद कर चुके होते हैं लेकिन फिर यही बात माननी पड़ती है कि स्मार्ट सिटी में रहने की बात ही अलग है। कभी कभार थोड़ी स्मार्टनेस कम हो भी गई तो क्या हुआ। पानी का क्या है उतर ही जाता है।  

- संतोष उत्सुक

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