By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 13, 2026
(लक्ष्मी देवी ऐरे) नयी दिल्ली, 13 सितंबर कृषि आदान (इनपुट) कंपनी एसएमएल लिमिटेड (पूर्व में सल्फर इंडिया लिमिटेड) अगले दो से तीन साल में शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की संभावना पर विचार कर रही है। कंपनी का उद्देश्य नई रसायन इकाइयों (एनसीई) के विकास के लिए आवश्यक पूंजी जुटाना है। कंपनी के प्रबंध निदेशक बिमल शाह ने पीटीआई-के साथ साक्षात्कार में कहा कि सूचीबद्धता को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
शाह ने कहा कि कंपनी पिछले करीब तीन वर्षों से एनसीई पर काम कर रही है और यह उसके कारोबार का एक महत्वपूर्ण ध्यान देने वाला क्षेत्र बन चुका है। हालांकि, ऐसे उत्पादों के विकास में बड़े निवेश की जरूरत होती है। कंपनी का अनुमान है कि एक एनसीई को बाजार में लाने में करीब 7-8 करोड़ डॉलर तक खर्च हो सकते हैं।
अभी तक कंपनी ने अपने शोध एवं विकास कार्यों का खर्च खुद वहन किया है। एसएमएल के पास करीब 450-470 करोड़ रुपये की नकदी है और कंपनी लगभग कर्ज-मुक्त स्थिति में है। प्रबंधन इस रकम का इस्तेमाल भविष्य में अधिग्रहण, नियामकीय परिसंपत्तियों या रणनीतिक साझेदारी के साथ एनसीई कार्यक्रम में कर सकता है।
शाह ने कहा कि कंपनी ने वर्षों से अपने बही-खाते को मजबूत रखा है और जमा पूंजी का इस्तेमाल सही अवसर मिलने पर किया जाएगा। कंपनी अपने पारंपरिक सल्फर उर्वरक कारोबार से आगे बढ़ते हुए फसल पोषण, फसल संरक्षण और जैविक उत्पादों पर भी ध्यान दे रही है। शाह के अनुसार, अगले तीन साल में इन तीन क्षेत्रों में फसल पोषण कंपनी का सबसे तेजी से बढ़ने वाला कारोबार हो सकता है।
कंपनी भारत के साथ-साथ वैश्विक बाजार में भी संतुलित और पोषक तत्वों के अधिक प्रभावी इस्तेमाल वाले उत्पादों को बढ़ावा दे रही है। कमजोर मानसून, अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्क और भू-राजनीतिक तनाव के कारण परिवहन में आ रही बाधाओं को देखते हुए एसएमएल ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपना राजस्व लक्ष्य घटाकर करीब 1,600 करोड़ रुपये कर दिया है। इससे पहले कंपनी ने 1,800 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा था।
हालांकि, नया लक्ष्य भी पिछले वित्त वर्ष के करीब 1,200-1,300 करोड़ रुपये के कारोबार से अधिक है। कंपनी ने अपने उत्पादों की कीमतों में करीब 15-20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है, जिससे राजस्व में वृद्धि की उम्मीद है। कंपनी का अंतरराष्ट्रीय कारोबार 80 से अधिक देशों में फैला हुआ है।
पिछले वित्त वर्ष में इससे करीब 600-700 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था। इस वित्त वर्ष कंपनी को अंतरराष्ट्रीय कारोबार से 700-800 करोड़ रुपये और अगले दो वर्षों में करीब 1,000 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल होने की उम्मीद है। कंपनी के निर्यात राजस्व में करीब 70 प्रतिशत हिस्सेदारी फसल संरक्षण उत्पादों की है।
इनमें कीटनाशक और फफूंदनाशक शामिल हैं।