By अभिनय आकाश | Oct 14, 2026
अगर अब के ईरान पर हमला हुआ तो ईरान की फौजी अपने पड़ोसी अरब देशों में घुस जाएंगी। यह थ्योरी पहले भी आती रही है, लेकिन इस बार खुद अमेरिकी मीडिया ने इसका आकलन किया है।अमेरिका में वॉलस्टेट जनरल की एक रिपोर्ट में साफ-साफ कहा गया है कि ईरान की 4 लाख की सेना घुस जाएगी और यह बेहद खतरनाक हालात होंगे। दरअसल इस वक्त अमेरिका में मिड टर्म इलेक्शंस की धूम है और कयास यह लग रहे हैं कि इलेक्शन के बाद ट्रंप और ज्यादा ताकत और आक्रामकता के साथ ईरान पर हमला करेंगे। ईरान ट्रंप के गले की फांस बन गया है। 8 माह बाद भी ईरान सिर पर सवार है और उनका इस्लामिक रेवोल्यूशन का नेतृत्व बरकरार है। ऐसे में अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जनरल का यह मानना है कि उनके पास यह रिपोर्ट है कि ईरान यह देखेगा कि मिड टर्म इलेक्शन के बाद प्रेसिडेंट ट्रंप ने ईरान पर अगर इसराइल के साथ मिलकर वापस से अटैक किया तो अबकी बार ईरान अपनी फोर्सेस लेकर पड़ोसी मुस्लिम देशों के अंदर एंटर कर जाएगा।
अमेरिकी अखबार की इस रिपोर्ट पर मिडिल ईस्ट एक्सपर्ट कहते हैं कि यह तो होना ही है। होर्मुज अब भी ईरान के कंट्रोल में है और ट्रंप खार खाए बैठे हैं कि कोई मुल्क अमेरिका को कैसे मात दे सकता है। यह उनकी अपनी इमेज पर भी दाग होगा। उन्हें अपने कार्यकाल में किसी भी कीमत पर ईरान से इस्लामिक रेवोल्यूशन का खात्मा करना है। अगर वह ना भी चाहें बातचीत से भी मामला सुलझाना चाहें तब भी इसराइल और अरब मुल्क अमेरिका को जाने नहीं देंगे खाली हाथ। ईरान उनके लिए बहुत बड़ा खतरा है। यही वजह है कि सब मिलकर बड़ा हमला कर सकते हैं। लेकिन ईरान भी पहले ही कह चुका है कि अगर हम पर हमला हुआ तो पलटवार दुनिया का भूगोल बदलने वाला होगा। एक्सपर्ट कहते हैं कि ईरान के हिमायती हूतियों के खिलाफ तो यमन में एक मोर्चा खोल भी दिया गया है। अब ईरान पर हमले के बहाने तलाशे जा रहे हैं। अमेरिका की तरफ से जो एक्शन हो रहा है उसे देखते हुए लगता है कि या तो अमेरिका ईरान को डराना चाह रहा है या फिर प्रेशर बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। इससे ईरान अपनी शर्तों को छोड़कर अमेरिका के हिसाब से समझौते की मेज पर आ जाए। लेकिन जंग का बहाना तलाशने के लिए फ्लाई दुबई प्लेन कांड का सहारा भी लिया जा सकता है। हालांकि ईरान का नाम अमेरिका ले जरूर रहा है शुरू से लेकिन अभी तक पूरी तरह से ईरान को इस वारदात के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। कहा जा रहा है कि जांच चल रही है। जांच जारी है। लेकिन हो सकता है कि आगे उसी रिपोर्ट के आधार पर ईरान पर हमला हो जाए। इस वारदात का जिम्मेदार ईरान था इसलिए अब हम इस पर अटैक कर रहे हैं। इस तरह का बहाना तलाश लिया जाए। मिडिल ईस्ट एक्सपर्ट कहते हैं कि अमेरिका के इशारों से यह तो दिख रहा है कि जंग के बादल छटे नहीं है और ईरान में आईआरजीसी भी पहले ही धमकी दे चुका है कि अगर इस बार हम पर हमला हुआ तो हमारा पलटवार ज्योग्राफी बदलने वाला होगा। यानी जंग सिर्फ मिडिल ईस्ट तक महदूद नहीं रहेगी बल्कि और आगे बढ़ेगी। सऊदी अरब और यमन के ईरान समर्पित हुती विद्रोहियों के बीच जारी संघर्ष अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है।