मैं गांधी या नायक नहीं, अपने जीवन के नायक स्वयं बनें: सोनम वांगचुक

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Jul 11, 2026

नयी दिल्ली में परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में जंतर-मंतर पर चल रहे धरने के बीच, जाने-माने शिक्षाविद् और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने देश के नागरिकों से एक बेहद महत्वपूर्ण अपील की है। वांगचुक ने लोगों से आग्रह किया है कि वे किसी और के नेतृत्व का इंतजार करने के बजाय अपने जीवन के 'नायक' खुद बनें। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वह कोई 'आधुनिक गांधी' या नायक नहीं हैं, बल्कि सिर्फ एक सामान्य नागरिक हैं जो अपना कर्तव्य निभाने का प्रयास कर रहे हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जारी एक वीडियो में सोनम वांगचुक ने आंदोलन को मिल रहे समर्थन के लिए लोगों का आभार जताया, लेकिन साथ ही दो तरह की टिप्पणियों पर अपनी निराशा और असहजता भी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कई लोग उन्हें 21वीं सदी का गांधी या नायक कहते हैं, लेकिन वह न तो गांधी हैं और न ही कोई नायक। वह सिर्फ एक सामान्य नागरिक हैं जो अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उन्होंने लोगों से कहा कि वे किसी और में नायक तलाशने के बजाय खुद अपनी नागरिक जिम्मेदारियां उठाएं।

परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं के कारण परेशान छात्रों की खुदकुशी की घटनाओं का जिक्र करते हुए वांगचुक ने लोगों से मूकदर्शक न बने रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि अगर पीड़ित छात्रों में से कोई किसी की बहन या बेटी होती तो लोग जरूर जुड़ते, इसलिए उस स्थिति का इंतजार किए बिना आंदोलन का हिस्सा बनें। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग दिल्ली नहीं आ सकते, वे जहां हैं वहीं से अनशन कर सोशल मीडिया पर अपना संदेश साझा करें।

वांगचुक ने आगामी 20 जुलाई को संसद तक होने वाले शांतिपूर्ण मार्च में लोगों से बड़ी संख्या में शामिल होने का आह्वान किया है ताकि सांसदों का ध्यान इस मुद्दे पर खींचा जा सके। उन्होंने कहा कि लोगों को उनकी तरह 24 दिन भूखे रहने की जरूरत नहीं है, वे भोजन करके आएं लेकिन एक नागरिक के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए 20 जुलाई को संसद मार्च का हिस्सा बनें। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोई भी कोशिश उनके शांतिपूर्ण विरोध के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन होगी।

इस आंदोलन के जरिए कॉजपा ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा अनियमितताओं के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की है। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन यानी 20 जुलाई को संगठन ने संसद तक शांतिपूर्ण मार्च का एलान किया है। बता दें कि यह प्रदर्शन 20 जून को शुरू हुआ था और वांगचुक 28 जून से इस अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

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