Amit Shah के सामने साउथ के CM ने की 2 बड़ी मांग, बैग देते समय थलापति विजय ने किया क्या इशारा?
By अभिनय आकाश | Aug 20, 2026
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के दौरान NEET (नॉट इन टैक्स) से छूट और प्रस्तावित परिसीमन विधेयक में दक्षिण के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की सुरक्षा जैसे प्रमुख मुद्दे उठाए। दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में पहली बार उपस्थित विजय ने हाल ही में तमिलनाडु की राजनीति के केंद्र में रहे इन दो मुद्दों पर जोर देने के साथ-साथ अंतरराज्यीय नशीली दवाओं के दुरुपयोग, नीली अर्थव्यवस्था और तटीय सुरक्षा में अधिक सहयोग का आह्वान किया। विजय ने मेडिकल कोर्स में दाखिले के लिए होने वाले एंट्रेंस टेस्ट NEET से तमिलनाडु को छूट दिलाने की मांग की। उनका तर्क था कि इससे ग्रामीण इलाकों के छात्रों और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को नुकसान होता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार टीवीके प्रमुख ने केंद्र सरकार से मांग की है कि तमिलनाडु को MBBS, BDS और AYUSH कोर्स में दाखिले के लिए सिर्फ़ 12वीं कक्षा के मार्क्स के आधार पर सीटें भरने की इजाज़त दी जाए। इस दौरान अमित शाह को फूलों का गुलदस्ता देने के बाद सीएम विजय एक काले रंग का बैग देते भी नजर आए। बैग देते वक्त इसके बारे में विजय इशारों में अमित शाह से कुछ कहते भी नजर आए। शायद वो अपने इस तोहफे के बारे में अमित शाह को कुछ बता रहे होंगे।
विजय ने उठाया NEET का मुद्दा
तमिलनाडु में DMK समेत कई सरकारों ने पिछले करीब एक दशक से NEET का विरोध किया है। तीन महीने पहले सत्ता में आए विजय ने भी NEET का ज़ोरदार विरोध किया है। असल में, एक्टर से नेता बने विजय ने पहले भी यह मांग की है कि शिक्षा को 'समवर्ती सूची' से हटाकर वापस 'राज्य सूची' में शामिल किया जाए। टीवीके असल में उस पुरानी व्यवस्था को वापस लाना चाहती है जिसमें राज्य सरकारें हायर सेकेंडरी (12वीं) के नतीजों के आधार पर मेडिकल कोर्स में दाखिले को कंट्रोल करती थीं। बैठक में विजय ने इस बात पर ज़ोर दिया कि NEET, तमिलनाडु के उस लंबे समय से चले आ रहे मॉडल को कमज़ोर करता है, जिसके तहत स्कूली शिक्षा के ज़रिए मेडिकल शिक्षा तक समान पहुँच सुनिश्चित की जाती है। सूत्रों के अनुसार, विजय ने अमित शाह से कहा, "तमिलनाडु अपने छात्रों के हितों की रक्षा करने और मेडिकल शिक्षा तक समान पहुँच सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मई में NEET-UG पेपर लीक होने के बाद यह मुद्दा ज़ोर पकड़ गया, जिससे दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ। आखिरकार, इसी वजह से धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा।