By नीरज कुमार दुबे | Jul 31, 2026
स्पेन की उत्तरी अफ्रीकी सीमा पर स्थित स्यूटा शहर एक बार फिर यूरोप के सबसे बड़े प्रवासन संकट का प्रतीक बन गया है। मोरक्को से हजारों प्रवासियों के अचानक सीमा पार कर इस छोटे से शहर में पहुंचने के बाद हालात इतने बेकाबू हो गए कि स्पेन सरकार को सेना तैनात करनी पड़ी। समुद्र के रास्ते यूरोप पहुंचने की कोशिश के दौरान दर्जनों लोगों की जान चली गई, जबकि स्थानीय प्रशासन की पूरी व्यवस्था भारी दबाव में आ गई। इस घटनाक्रम ने केवल स्पेन की सीमा सुरक्षा को ही नहीं, बल्कि पूरे यूरोप में अवैध प्रवासन, मानवीय संकट और मोरक्को के साथ रिश्तों को लेकर नई राजनीतिक और कूटनीतिक बहस छेड़ दी है।
हम आपको बता दें कि स्यूटा उत्तरी अफ्रीका के तट पर स्थित स्पेन का एक स्वायत्त शहर है। यह मोरक्को से लगी लगभग छह मील लंबी प्रायद्वीपीय पट्टी पर बसा हुआ है और जिब्राल्टर जलडमरूमध्य के पार मुख्य स्पेन से जुड़ा हुआ है। मेलिला के साथ मिलकर स्यूटा यूरोपीय संघ और अफ्रीका के बीच एकमात्र स्थलीय सीमा बनाता है। सोलहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध से स्पेन के नियंत्रण में होने के बावजूद मोरक्को आज भी इस क्षेत्र पर स्पेन की संप्रभुता को स्वीकार नहीं करता और इसे अपने कब्जे वाला इलाका मानता है।
यही कारण है कि स्यूटा लंबे समय से यूरोप पहुंचने की कोशिश करने वाले प्रवासियों का सबसे बड़ा प्रवेश द्वार बना हुआ है। मोरक्को के निकटवर्ती शहरों से लोग सीमा पर लगी दोहरी बाड़ को पार करने, उसे काटने या समुद्र के रास्ते तैरकर स्यूटा पहुंचने की कोशिश करते हैं। कई लोग फुलाए जाने वाले छल्लों और तैराकी उपकरणों की मदद से समुद्र पार करते हैं। जो लोग स्यूटा पहुंच जाते हैं, वे स्पेन में शरण मांग सकते हैं, हालांकि दोनों देशों के बीच हुए समझौतों के तहत बड़ी संख्या में लोगों को तुरंत मोरक्को वापस भी भेज दिया जाता है।
इस सप्ताह स्थिति अचानक विस्फोटक हो गई। कई दिनों से सीमा पार करने की कोशिशें बढ़ रही थीं, लेकिन गुरुवार को हजारों लोग एक साथ समुद्र में उतर पड़े। अनेक प्रवासी समुद्री अवरोधों के आसपास से तैरकर स्यूटा पहुंचे, जबकि कुछ स्थानीय समुद्र तटों तक पहुंचने में सफल रहे। घटनास्थल से सामने आए दृश्य बताते हैं कि इनमें केवल युवा पुरुष ही नहीं बल्कि महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे।
हालांकि यूरोप तक पहुंचने का यह रास्ता अपेक्षाकृत छोटा माना जाता है, लेकिन यह बेहद खतरनाक भी है। तेज समुद्री धाराएं, एक साथ बड़ी संख्या में लोगों का पानी में उतरना और सीमा अवरोधों को पार करने की कोशिश ने इसे मौत का रास्ता बना दिया। इस दौरान कई लोगों की जान चली गई, जबकि कई अन्य समुद्र में फंस गए जिन्हें बचाव दलों ने सुरक्षित निकाला।
बेकाबू हालात को देखते हुए स्पेन सरकार ने सेना को मोर्चे पर उतार दिया है। सेना के जवानों को नागरिक सुरक्षा बलों की सहायता के लिए तैनात किया गया है। समुद्र और हवाई निगरानी बढ़ा दी गई है, गोताखोर दल लगातार समुद्री क्षेत्र में गश्त कर रहे हैं और सीमा सुरक्षा को मजबूत किया जा रहा है। प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज़ के भी स्यूटा का दौरा करने की संभावना जताई गई है ताकि हालात का प्रत्यक्ष आकलन किया जा सके।
हम आपको बता दें कि स्यूटा को लेकर स्पेन और मोरक्को के बीच तनाव कोई नई बात नहीं है। वर्ष 2021 में भी मोरक्को द्वारा सीमा नियंत्रण में ढील दिए जाने के बाद दो दिनों के भीतर लगभग आठ हजार प्रवासी स्यूटा पहुंच गए थे। उस समय इसे पश्चिमी सहारा के स्वतंत्रता आंदोलन के नेता को स्पेन द्वारा चिकित्सा सुविधा देने के जवाब के रूप में देखा गया था। बाद में स्पेन ने पश्चिमी सहारा पर अपना रुख बदला और सीमा प्रबंधन में मोरक्को के साथ सहयोग बढ़ाया, जिसके बाद दोनों देशों के संबंधों में कुछ सुधार आया।
इस बार प्रवासियों की इतनी बड़ी संख्या में आवाजाही के पीछे के कारणों को लेकर अभी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है। स्पेन के कुछ अधिकारियों का मानना है कि मानव तस्करी गिरोहों ने हाल ही में आए सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले का फायदा उठाकर लोगों को सीमा पार करने के लिए उकसाया। उस फैसले में कहा गया था कि समुद्र में पकड़े गए प्रवासियों को स्वतः मोरक्को वापस नहीं भेजा जा सकता। कुछ विशेषज्ञ यह भी मान रहे हैं कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव की पृष्ठभूमि ने भी इस संकट को हवा दी हो सकती है, हालांकि इसके समर्थन में अभी कोई आधिकारिक प्रमाण नहीं है।
यह संकट अब स्पेन की आंतरिक राजनीति का भी बड़ा मुद्दा बन गया है। रूढ़िवादी और दक्षिणपंथी दलों ने सरकार पर देश की सीमाओं की रक्षा में विफल रहने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अवैध प्रवासियों को नियमित दर्जा देने से जुड़े हालिया प्रस्तावों ने और अधिक लोगों को अवैध रूप से सीमा पार करने के लिए प्रोत्साहित किया है। सरकार इन आरोपों को खारिज करते हुए कह रही है कि सीमा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और साथ ही अंतरराष्ट्रीय मानवीय दायित्वों का पालन भी किया जाएगा।
देखा जाये तो स्यूटा का संकट केवल स्पेन तक सीमित नहीं है। चूंकि यह यूरोपीय संघ की बाहरी सीमा है, इसलिए पूरा यूरोप इस पर नजर बनाए हुए है। इटली ने अनियंत्रित प्रवासन को यूरोप की सामूहिक सुरक्षा के लिए चुनौती बताते हुए असाधारण कदम उठाने और खुली सीमा व्यवस्था की समीक्षा तक की बात कही है। दूसरी ओर स्पेन ने स्पष्ट किया है कि प्रवासन जैसे गंभीर मानवीय मुद्दे को घरेलू राजनीति का हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए और पूरे यूरोप को साझा जिम्मेदारी निभानी होगी। यूरोपीय संघ की सीमा एवं तटरक्षक एजेंसी ने भी स्पेन को हरसंभव सहायता देने की पेशकश की है।
बहरहाल, ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि स्यूटा केवल एक सीमावर्ती शहर नहीं, बल्कि यूरोप की प्रवासन नीति, सीमा सुरक्षा, मानव तस्करी और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के टकराव का सबसे संवेदनशील मोर्चा बन चुका है। हजारों लोगों का एक साथ सीमा पार करना, दर्जनों लोगों की मौत और सेना की तैनाती इस बात का संकेत है कि यदि इस समस्या का स्थायी और मानवीय समाधान नहीं निकाला गया तो स्यूटा आने वाले समय में भी यूरोप के लिए सबसे कठिन सुरक्षा और मानवीय चुनौतियों में से एक बना रहेगा।