Magh Purnima 2025: माघ पूर्णिमा पर स्नान-दान का है विशेष महत्व, ऐसे करें लक्ष्मी नारायण की पूजा

By अनन्या मिश्रा | Feb 12, 2025

हिंदू धर्म में पूर्णिमा व्रत को उत्तम और शुभ फलदायी माना गया है। वैसे तो पूर्णिमा तिथि हर महीने आती है और हर महीने की पूर्णिमा व्रत का अलग-अलग फल प्राप्त होता है। लेकिन माघ माह की पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। बता दें कि इस बार 12 फरवरी 2025 को माघ पूर्णिमा का व्रत किया जा रहा है। इस दिन भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है। माघ पूर्णिमा पर स्नान-दान का विशेष महत्व होता है। साथ ही इस दिन शाम को चंद्रदेव को अर्घ्य दिया जाता है। इस दिन पूजा से जुड़े कार्यों में शामिल होने से जीवन में शुभता आती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको माघ पूर्णिमा व्रत के महत्व, पूजन विधि और चंद्रोदय के समय के बारे में बताने जा रहे हैं।

हिंदू पंचांग के अनुसार, 11 फरवरी 2025 की शाम में 06:41 मिनट से माघ पूर्णिमा तिथि लग जाएगी। फिर 12 फरवरी 2025 की शाम 06:53 मिनट तक पूर्णिमा तिथि रहेगी। उदयातिथि के मुताबिक 12 फरवरी 2025 को माघ पूर्णिमा का व्रत किया जाएगा। शास्त्रों में विधान है कि प्रदोष काल में पूर्णिमा तिथि होने पर ही पूर्णिमा व्रत किया जाता है। इसलिए 12 फरवरी 2025 को सूर्यास्त के समय ही चंद्रदेव को अर्घ्य देना होगा और 12 फरवरी को व्रत करना उत्तम माना जाएगा।

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माघ पूर्णिमा का महत्व

दरअसल, धार्मिक शास्त्रों में माघ महीने का विशेष महत्व बताया गया है। माघ महीने को कार्तिक माह के समान पुण्यदायी माना गया है। ऐसे में माघ महीने की पूर्णिमा तिथि का भी विशेष महत्व है। माघ शुक्ल की पूर्णिमा तिथि को सुबह स्नान आदि करने के बाद जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु का पूजन करें। इसके बाद पितरों का श्राद्ध करें और गरीबों व असमर्थों को भोजन, वस्त्र और आश्रय दें। साथ ही कम्बल, कपास, तिल, गुड़, घी, मोदक, फल, अन्न और सुवर्णादि का दान यथासंभव दान करें। फिर ब्राह्मणों को भोजन कराएं और कथा का पाठ करें।

माघ पूर्णिमा पर चंद्रोदय का समय

बता दें कि 12 फरवरी 2025 को माघ पूर्णिमा का चांद शाम को 06:00 बजे दिखाई देगा। वहीं पूर्णिमा तिथि 06:53 मिनट तक रहेगी। ऐसे में 06:00 से 06:53 मिनट तक चंद्रमा को अर्घ्य दे सकते हैं।

माघ पूर्णिमा पूजा विधि

माघ पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी स्नान आदि कर सूर्यदेव को अर्घ्य दें और व्रत का संकल्प लें।

इसके बाद पूजा स्थल की अच्छे से सफाई करें और मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु का विधि-विधान से पूजा करें।

फिर लकड़ी की चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाएं और फिर इसके चारों ओर कलावा बांध दें।

अब श्रीहरि विष्णु को पंचामृत से स्नान कराएं और उनको वस्त्र अर्पित कर तिलक आदि करें।

फिर प्रसाद के लिए पंचामृत और केसर आदि रख लें औऱ पूर्णिमा व्रत कथा का पाठ करें।

पूजा के अंत में आरती करें पूजा में हुई भूलचूक के लिए क्षमा मांगे।

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