By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Mar 25, 2026
कांग्रेस ने बुधवार को दावा किया कि सरकार महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन के लिए अगले पखवाड़े में संसद का दो दिवसीय विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में हैं, जो चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन होगा। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह आरोप भी लगाया कि निर्वाचन आयोग ने आदर्श आचार संहिता को ‘‘मोदी आचार संहिता’’ में बदल दिया है। अगले महीने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव है।
उन्होंने दावा किया कि अब ‘‘पलटी मारने के उस्ताद’’ ने 30 महीने बाद अचानक अपना मन बदल लिया है और परिसीमन एवं जनगणना की प्रक्रिया पूरी किए बिना ही आरक्षण लागू करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री बड़े पैमाने पर लोगों का ध्यान भटकाने के हथियारों का उपयोग करने में माहिर हैं। वह ऐसा पहले भी कई बार कर चुके हैं और अब फिर वही कर रहे हैं। अपनी विदेश नीति की विफलताओं तथा देश के सामने मौजूद एलपीजी और ऊर्जा संकट से ध्यान हटाने के लिए वह इस नयी पहल के साथ आए हैं।’’ उन्होंने कहा कि इसका पूरा राजनीतिक लाभ लेने के लिए प्रधानमंत्री ने यह जानकारी दे दी है कि नारी वंदन अधिनियम, 2023 में आवश्यक संशोधनों को पारित करने के लिए अगले पखवाड़े में संसद का दो दिवसीय विशेष सत्र सत्र बुलाया जाएगा। रमेश ने कहा, ‘‘विपक्षी दलों ने मोदी सरकार को पत्र लिखकर कहा है कि पहले 29 अप्रैल को मौजूदा विधानसभा चुनावों का दौर पूरा होने के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, जिसमें प्रस्तावित संशोधनों पर चर्चा की जा सके। मोदी सरकार लोकसभा और विधानसभा की सीट की संख्या 50 प्रतिशत तक बढ़ाने की भी योजना बना रही है। इस पर भी गंभीर विचार-विमर्श की आवश्यकता है।’’
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग की आदर्श आचार संहिता को मोदी प्रचार संहिता बना दिया गया है। उनका कहना है, ‘‘अप्रैल में किसी भी दिन दो-दिवसीय विशेष सत्र बुलाना एक आचार संहिता का उल्लंघन होगा लेकिन मोदी आचार संहिता के अनुरूप होगा।’’ रमेश ने दावा किया कि इससे यह सवाल भी गंभीर रूप से उठता है कि अप्रैल 2025 में घोषित जाति जनगणना को कराने के प्रति मोदी सरकार की वास्तविक प्रतिबद्धता क्या है, जबकि इससे पहले ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ और 2024 लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान इस मांग को उठाने पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेताओं पर ‘शहरी नक्सल मानसिकता’ का आरोप लगाया गया था।