गति, लचीलापन और घातक प्रहार, यही है 'Bhairav' Commandos की पहचान, 31 अक्टूबर तक China और Pakistan Border पर हो जायेगी तैनाती

By नीरज कुमार दुबे | Aug 30, 2025

भारत का सुरक्षा परिदृश्य लगातार जटिल होता जा रहा है। एक ओर चीन अपनी विस्तारवादी नीतियों के साथ सीमा पर दबाव बनाए हुए है, तो दूसरी ओर पाकिस्तान छद्म युद्ध और आतंकवाद के ज़रिए भारत को अस्थिर करने की कोशिश करता रहता है। ऐसे समय में भारतीय सेना का ‘भैरव कमांडो’ बल का गठन करना एक निर्णायक कदम है। खास बात यह है कि इसी साल 31 अक्टूबर तक भैरव बटालियन चीन और पाकिस्तानी सीमा पर तैनात भी हो जायेंगी। हम आपको बता दें कि ये नई इकाइयाँ आकार में छोटी लेकिन युद्धक क्षमता में कहीं अधिक घातक होंगी। गति, लचीलापन और सटीक प्रहार इनकी पहचान होगी। अत्याधुनिक हथियारों, ड्रोन और हाई-टेक गैजेट्स से लैस ‘भैरव’ कमांडो पल भर में दुश्मन को चौंकाकर उसकी रणनीति ध्वस्त कर देंगे। इससे न केवल सेना की सामरिक शक्ति बढ़ेगी बल्कि स्पेशल फ़ोर्सेस को भी अपने गुप्त अभियानों पर पूरी तरह केंद्रित रहने का अवसर मिलेगा।

हम आपको बता दें कि सेना अब पाँच नई ‘भैरव’ लाइट कमांडो बटालियन खड़ी कर रही है, जिनमें प्रत्येक में 250 विशेष रूप से प्रशिक्षित और अत्याधुनिक हथियारों से लैस जवान होंगे। इन इकाइयों का उद्देश्य पाकिस्तान और चीन की सीमाओं पर तेज़ और निर्णायक कार्रवाई करने की क्षमता को बढ़ाना है।

क्यों ज़रूरी हैं ‘भैरव’ कमांडो?

हम आपको बता दें कि भारत के पास पहले से ही 10 पैरा स्पेशल फ़ोर्सेस और पाँच पैरा (एयरबॉर्न) बटालियन मौजूद हैं, जिनकी भूमिका शत्रु क्षेत्र में गुप्त और जोखिमभरे मिशनों को अंजाम देना है। लेकिन समय के साथ यह देखा गया कि इन उच्च स्तरीय इकाइयों को कई बार छोटे-छोटे सामरिक अभियानों में भी झोंक दिया जाता है। ऐसे में स्पेशल फ़ोर्सेस की मुख्य भूमिका प्रभावित होती है। ‘भैरव’ बटालियन इस अंतर को भरेंगी—ये सामान्य पैदल सेना और स्पेशल फ़ोर्सेस के बीच की कड़ी बनेंगी। इससे स्पेशल फ़ोर्सेस अपने असली रणनीतिक और गुप्त अभियानों पर ध्यान केंद्रित कर पाएंगी।

तैनाती और संरचना

हम आपको बता दें कि पहली पाँच ‘भैरव’ इकाइयों में से तीन, जम्मू-कश्मीर में सेना की उत्तरी कमान के अधीन होंगी। इनमें एक 14 कोर (लेह), एक 15 कोर (श्रीनगर), एक 16 कोर (नागरोटा) और चौथी इकाई पश्चिमी सेक्टर के रेगिस्तानी इलाके में और पाँचवीं पूर्वी सेक्टर के पहाड़ी इलाके में तैनात होगी।

हम आपको बता दें कि 11.5 लाख सैनिकों वाली भारतीय सेना में पहले से 415 पैदल सेना बटालियन हैं (प्रत्येक में लगभग 800 जवान)। इन्हीं से चुन-चुनकर ‘भैरव’ कमांडो तैयार किए जाएंगे। यह “सेव एंड रेज़” कांसेप्ट है, यानी नई भर्ती किए बिना, मौजूदा संसाधनों का पुनर्गठन।

युद्धक विशेषताएँ

यह आकार में छोटी और फुर्तीली होगी, अत्याधुनिक हथियार, गैजेट्स और ड्रोन से लैस होगी। गति, लचीलापन और हाई-इम्पैक्ट ऑपरेशन्स के लिए इसे डिज़ाइन किया जायेगा। इसमें प्रत्येक इकाई में 7-8 अधिकारी होंगे। इनकी ट्रेनिंग दो से तीन महीने अपने-अपने रेजिमेंटल केंद्रों पर होगी और उसके बाद एक महीने तक स्पेशल फ़ोर्सेस इकाइयों के साथ एडवांस प्रशिक्षण मिलेगा।

सेना की आधुनिक युद्ध रणनीति

हम आपको याद दिला दें कि सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने हाल ही में ऐलान किया था कि ‘भैरव’ बटालियनों के अलावा ‘रुद्र’ ऑल-आर्म्स ब्रिगेड, ‘शक्तिबान’ आर्टिलरी रेजीमेंट और ‘दिव्यास्त्र’ निगरानी व लूटेरिंग म्यूनिशन बैटरियां भी बनाई जाएंगी। साथ ही अब हर पैदल सेना बटालियन में समर्पित ड्रोन प्लाटून होगी। इसके समानांतर त्रि-सेवा विशेष बलों (Special Forces) के लिए नई संयुक्त सिद्धांत (Joint Doctrine) भी जारी की गई है। वर्तमान में वायुसेना के पास 1,600 ‘गरुड़’ कमांडो और नौसेना के पास 1,400 से अधिक मरीन कमांडो (मार्कोस) हैं।

बहरहाल, ‘भैरव’ बटालियन भारतीय सेना की रणनीतिक सोच में एक महत्वपूर्ण विकास है। इनका गठन दर्शाता है कि भविष्य के युद्ध केवल भारी संख्या पर नहीं, बल्कि गति, तकनीक और सटीक हमलों पर आधारित होंगे। पाकिस्तान और चीन दोनों मोर्चों पर यह नई पहल भारत की सुरक्षा को और मजबूत करेगी तथा स्पेशल फ़ोर्सेस को उनके वास्तविक मिशनों पर केंद्रित रहने का अवसर देगी।

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