By दिव्यांशी भदौरिया | Apr 14, 2026
क्या आपको भी हैंडमेड और ट्रेडिशनल साड़ियां पहनने का शौक है? तो आप ने मधुबनी साड़ी का नाम जरुर सुना होगा। यह साड़ी दिखने में काफी खूबसूरत लगती है। भारत के ज्यादातर राज्यों में वहां के साड़ियों की संस्कृति जरुर झलक दिखती है। अगर आप भी मन बना रहे हैं मधुबनी साड़ी खरीदने का तो यह लेख सिर्फ आपके लिए है। लेकिन माधुबनी साड़ी खरीदने से पहले इसकी असली-नकली में पहचान करना काफी जरुरी है। वरना आपके सारे पैसे बर्बाद हो जाएंगे।
- सबसे पहले कपड़ा कॉटन या सिल्क लिया जाता है।
- अब उसे साफ करने के लिए सुखाया जाता है।
- फिर कलाकर पेंसिल या सीधे ब्रश से डिजाइन किया जाता है।
- इसके बाद नेचुरल या फैब्रिक कलर से हाथ से पेटिंग की जाती है।
- असल में जब कलर किया जाता है तो काफी बारीकी से किया जाता है।
- मधुबनी साड़ी बनाने में कई दिन या कभी-कभी हफ्ते लग जाते हैं।
क्या खासियत मधुबनी प्रिंट की?
मधुबनी साड़ियों में ज्यादातर देवी-देवता, पेड़-पौधे, जानवर, सूरज-चांद जैसे डिजाइन बने रहते हैं। खास बात यह है कि इन साड़ियों में बहुत कम जगह छोड़ी जाती है और हर हिस्सा छोटे-छोटे पैटर्न से भरा हुआ नजर आता है। इसके अलावा रंग ज्यादा चटकीले और कॉन्ट्रास्ट में इस्तेमाल किए जाते हैं। बॉर्डर और अंदर के डिजाइन की बात करें तो यह डिटेल में बने हुए होते हैं।
बाकी से क्यों अलग होती हैं मधुबनी साड़ियां?
ये साड़िया सबसे अलग इसलिए होती है क्योंकि ये मशीन से प्रिंट नहीं होती है, बल्कि हैंडमेड होती है। इन साड़ियों में हर डिजाइन में कालाकारों की मेहनत और कहानी साफ नजर आती है। इसमें ट्रेडिशन और कला दोनों नजर आते हैं। आज के समय में भी मधुबनी साड़िया केवल फैशन नहीं, बल्कि एक कल्चर का हिस्सा होता है।
नेचुरल कलर्स का होता है इस्तेमाल
गौरतलब है कि एक अच्छी मधुबनी साड़ी पहनने में काफी कंफर्टेबल होती है और यह दिखने में काफी रॉयल नजर आती है। असली मधुबनी साड़ी की चमक अलग होती है क्योंकि यह प्राकृतिक रंगों से बनीं होती है, इनमें पेड़-पौधों से निकले रंगों का इस्तेमाल किया जाता है।
खरीदते समय कैसे करें असली मधुबनी साड़ी की पहचान
हाथ से बनीं फिनिश देखें
जब भी आप मधुबनी साड़ी खरीदने जाएं, तो यहां पर हल्की-हल्की अनइवन लाइनें दिखेंगी। ब्रश के निशानों पर ध्यान देना। अगर आपको यह साफ नजर आ रहे है, तो यह असली है। ऐसा है कि ये साड़ी मशीन प्रिंट तरह परफेक्ट नहीं होती है।
पीछे की तरफ भी रंग दिखेगा
यदि साड़ी हैंड पेंटेड है, तो रंग कपड़े के पीछे भी हल्का-हल्का नजर आता है। दरअसल, कई साड़ियों में मशीन प्रिंटेड का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें पीछे का हिस्सा साफ या फीका होता है।
डिजाइन यूनिक लगेगा
यदि आपको दो साड़ियां एक जैसी लग रही है, तो समझ जाना कि ये मशीन प्रिंटेड है, क्योंकि मशीन प्रिंट में ही सब कुछ परफेक्ट नजर आता है।
रंगों पर ध्यान दें
मधुबनी साड़ी खरीदने से पहले आप रंगों का ध्यान जरुर रखें। दरअसल इसके रंग नेचुरल और गहरे नजर आते हैं। नकली साड़ी में कलर्स काफी शाइनी होते हैं।
कीमत जरूर देखें
मधुबनी साड़ियां हाथों से बनाई जाती हैं, इसलिए इनकी कीमत सामान्य साड़ियों की तुलना में कुछ अधिक होती है। यदि आपको यह साड़ी बेहद कम दाम में मिल रही है, तो उसे खरीदने से पहले उसकी गुणवत्ता और असलियत की जांच जरूर कर लें।
इन बातों का विशेष रखें ध्यान
-हमेशा किसी आर्टिस्ट से ही इन साड़ियों को खरीदें।
- किसी सरकारी गवर्नमेंट हैंडलूम से साड़ियां खरीदें, जिससे आपको असली साड़िया मिले।
- इस बात का ध्यान रखें कि किसी शोरूम से ये साड़ियां न खरीदें, वरना आपको डिजिटल प्रिंटेड साड़ियां मिल जाएगी।