By Ankit Jaiswal | Jan 11, 2026
बाजार में पिछले सप्ताह निवेशकों को झटका लगा है और सेंसेक्स-निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक जबरदस्त बिकवाली के दबाव में लाल निशान पर बंद हुए हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार कमजोर वैश्विक संकेतों और अनिश्चितता के बढ़ते माहौल ने निवेशकों के मनोबल को कमजोर किया, जिससे सेंसेक्स में लगभग 2.55 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 83,576.24 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी लगभग 2.45 प्रतिशत टूटकर 25,683.30 पर आ गया है, जो हाल के महीनों में एक महत्वपूर्ण साप्ताहिक गिरावट है।
बता दें कि व्यापक बाजार भी अग्रणी सूचकांकों की तुलना में कमजोर प्रदर्शन कर रहे हैं, जो जोखिम को टालने की प्रवृत्ति को दर्शाता है। वैश्विक स्तर पर व्यापार और आर्थिक संबंधों से जुड़ी चिंताओं, खासकर डोनाल्ड ट्रम्प काल के टैरिफों पर अनिश्चितता, ने भारतीय शेयर बाजार की मनोदशा को प्रभावित किया है। अमेरिकी व्यापार नीतियों से जुड़ी चिंताओं और संभावित उच्च टैरिफ से संबंधित जोखिमों के कारण निवेशक सतर्क हो गए हैं और विदेशी संस्थागत निवेशकों की निरंतर बिकवाली ने दबाव और बढ़ाया है।
गौरतलब है कि बीते पांच कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लगातार गिरावट में रहे हैं, जिससे बाजार में गिरावट का रुझान और सुदृढ़ हुआ है। निवेशकों की संपत्ति में भी इस दौरान बड़ी गिरावट आई है, जिससे बाजार पूंजीकरण में भारी नुकसान दर्ज हुआ है।
बाज़ार के परिदृश्य पर आने वाले सप्ताह के दौरान कई महत्वपूर्ण कारक असर डाल सकते हैं, जिनमें तीसरी तिमाही की कंपनियों की आय रिपोर्ट, प्रमुख घरेलू आर्थिक संकेतक जैसे CPI और WPI मुद्रास्फीति, व्यापार संतुलन और विदेशी विनिमय भंडार से जुड़ा डेटा शामिल हैं। निवेशक इन आंकड़ों को देखते हुए अगले कदम के लिए रणनीति बनाएंगे।
इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधि, विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर के उतार-चढ़ाव और वस्तु कीमतों की स्थिति भी रुपये पर दबाव बनाए हुए हैं और बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं। तकनीकी दृष्टिकोण से, निफ्टी अपने 20-दिन और 50-दिन के औसत से नीचे कारोबार कर रहा है, जो संभावित रूप से बाजार में और नरमी का संकेत दे सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह 100-दिन के औसत से नीचे टूटता है तो और तेज बिकवाली देखने को मिल सकती है।