कारगिल युद्ध में 15 गोलियां सीने पर खाकर, पाकिस्तान के सारें बंकरो को तबाह कर वापस लौटे थे योगेन्द्र

By रेनू तिवारी | Jul 24, 2019

ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव को कारगिल युद्ध के दौरान दिखाए गये अदम्य साहस के लिए उच्चतम भारतीय सैन्य सम्मान परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया। ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव कारगिल युद्ध के दौरान जूनियर कमीशनन्ड ऑफिसर (JCO) थे। वर्तमान में वह सूबेदार मेजर हैं। ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव को 19 साल की उम्र में परमवीर चक्र प्राप्त हुआ। योगेन्द्र सिंह यादव सबसे कम उम्र के सैनिक हैं जिन्हें यह सम्मान प्राप्त हुआ। योगेंद्र सिंह यादव का जन्म 10 मई 1980 को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के सिकंद्राबाद के औरंगाबाद अहीर गाँव में हुआ था। उनके पिता करण सिंह यादव ने 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्धों में भाग लेते हुए कुमाऊं रेजीमेंट में सेवा की थी। यादव 16 की आयु में भारतीय सेना में शामिल हुए। 

ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव को कारगिल युद्ध के दौरान टाइगर हिल के बेहद अहम तीन दुश्मन बंकरों पर कब्ज़ा करने का दायित्व सौंपा गया था। जिसका दायित्व योगेन्द्र सिंह यादव ने आगे बढ़कर खुद लिया था। योगेन्द्र सिंह यादव बंकरों को नष्ट करने के लिए अपनी टीम बनाकर आगे बढ़े। टाइगर हिल पर जाने के लिए ऊंची चढ़ाई करनी थी जिसके लिए योगेन्द्र सिंह यादव ने योजना बना कर चढ़ाई शुरू की। घातक कमाण्डो पलटन के सदस्य ग्रेनेडियर यादव अपनी टीम के साथ बंकर के पास पहुंचने वाले थे तभी पाकिस्तानी घुसपैठियों ने मशीनगन से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी, इस गोलीबारी में यादव की टीम के अधिकतर जवान शहीद हो गये और कुछ बेहद गंभीर रूप से घायल हो गये। ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव को भी मशीनगन से हुई फायरिंग में तीन गोलियां लगी थीं लेकिन योगेन्द्र सिंह यादव के हौसले बुंलद थे वह अपना दायित्व पूरा करने के लिए बंकर को तबाह करने के लिए आगे बढ़े। दुश्मनों की गोलियों का स्वागत करते हुए वो आगे बढ़ते रहे और बंकर पर छलांग लगा दी, बंकर में मशीनगन को चलाने वालों के यादव ने अकेले ही मौत के घाट उतार दिया। यादव के साथ आये और साथी जब तबाह हुए बंकर के पास पहुंचे तो सेना की टुकड़ी ने देखा कि ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव  का एक हाथ टूट चुका था उनके शरीर में 15 गोलियां लगी हुई थीं। लेकिन इस सलामी सेना के जवान ने हाथ टूटने के बाद और 15 गोलियां खाने के बाद भी हार नहीं मानी और अंतिम बंकर को नष्ट करने के लिए साथियों के साथ आगे बढ़े और अंतिम बंकर पर धावा बोल दिया। इस के साथ ही उन्होंने सभी बंकरों को नष्ट करके विजय प्राप्त हुई। 

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आपको बता दें कि ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव वो जांबाज वीर थे 15 कारगिल की जंग से 15 गोलियां लगने के बाद वापस लौटे थे। सबको लगा था कि वह शहीद हो गये। जान की बाजी लगा कर देश की सेवा करने के कारण भारत सरकार द्वारा मरणोपरांत परमवीर चक्र का सम्मान दिया गया था किन्तु बाद में उन्हें बचा लिया गया।

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