कलयुग में यहां बसते हैं भगवान विष्णु, तीर्थयात्रियों के आकर्षण का केंद्र

By कमल सिंघी | May 13, 2020

भगवान वेंकटेश्वर को विष्णु देव का अवतार माना जाता है। वेंकट पहाड़ी के स्वामी होने की वजह से भगवान विष्णु को वेंकटेश्वर कहते हैं। सात पहाड़ों का भगवान भी कहा जाता है भगवान विष्णु को। तिरुपति बालाजी मंदिर में साल के 12 महीनों में एक भी माह ऐसा नहीं गुजरता है कि जब भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन करने के लिए भक्तों की कतारें नहीं लगी हों। भगवान वेंकटेश स्वामी को संपूर्ण ब्रह्माण्ड का स्वामी माना जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर आन्धप्रदेश के चित्तूर जिले के तिरुपति में हैं। यह भारत के प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में से एक है। 

जब भगवान विष्णु ने किया था विश्राम 

तिरुपति बालाजी मंदिर के बारे में एक मान्यता है कि भगवान विष्णु ने यहां कुछ समय के लिए विश्राम किया था। तिरुमला के पुष्करणी नाम के तालाब के किनारे भगवान विष्णु ने निवास किया था। मंदिर के पास लगे हुए इस पुष्करणी पवित्र जलकुण्ड के पान का उपयोग सिर्फ मंदिर के पूजन और सेवाकार्यों जैसे कामों में किया जाता है। इस कुण्ड का पानी पूरी तरह से साफ और कीटाणुरहित है। भक्त इस कुण्ड के पवित्र जल में डुबकी भी लगाते हैं। कहा जाता है, कि भगवान विष्णु ने वैकुण्ठ में इसी कुण्ड में स्नान किया था। मान्यता है कि इस कुण्ड में स्नान से सारे पाप धुल जाते हैं, साथ ही सभी सुखों की प्राप्ति होती है। बगैर स्नान के इस मंदिर में कोई भी प्रवेश नहीं कर सकता है। कहा जाता है कि मंदिर का इतिहास 9वीं शताब्दी से प्रारंभ होता है, जब कांचीपुरम के शासक वंश पल्लवों ने इस जगह पर अपना आधिपत्य स्थापित किया था, लेकिन 15 वीं सदी के विजयनगर वंश के शासन के बाद भी इस मंदिर की ख्याति सीमित होती गई। 15 वीं सदी के बाद मंदिर की प्रसिद्धि दूर-दूर तक जाने लगी। 1843 से 1933 ई. तक अंग्रेजों के शासन के तहत मंदिर का प्रबंधन हातीरामजी मठ के महंत ने संभाला। 1933 में इस मंदिर का प्रबंधन काम मद्रास की सरकार ने ले लिया। मंदिर की स्वतंत्र समिति तिरुमाला-तिरुपति मंदिर प्रबंधन का काम संभालती है। 

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तिरुमला की पहाड़ियां हैं सप्तगिरि

तिरुपति बालाजी मंदिर के आसपास बनी पहाड़ियां शेषनाग के सात फनों के आधार पर बनी होने से सप्तगिरि कही जाती है। भगवान वेंकटेश्वर का यह मंदिर सप्तगिरि की सातवीं पहाड़ी पर है। यह वेंकटाद्रि के नाम से प्रसिध्द है। मंदिर से कई पौराणिक मान्यताएं जुड़ी हुई है। इनके अनुसार तिरुपति बालाजी मंदिर की स्थापना भगवान वेंकटेश्वर की प्रतिमा में ही भगवान विष्णु बसते हैं। भगवान विष्णु यहां समूचे कलियुग में विराजमान रहते हैं। यहां सभी धर्म के अनुयायियों के लिए मंदिर खुला रहता है। यहां बिना किसी भेदभाव और बगैर रोकटोक के किसी भी जाति और किसी भी धर्म के लोग आ-जा सकते हैं। 

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कैसे जाएं और कहां ठहरें

तिरुपति बालाजी मंदिर जाने के लिए सड़क मार्ग, रेल मार्ग और हवाई मार्ग उपलब्ध हैं। तिरुपति पर एक छोटा-सा हवाई अड्डा भी है। चेन्नई से 130 किलोमीटर दूरी पर मुख्य रेलवे स्टेशन है। एपीएसआरटीसी की बस सेवा भी उपलब्ध है। हैदराबाद, बेंगलुरु और चेन्नई के लिए सड़क मार्ग और रेल सुविधा है।

- कमल सिंघी

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