संकल्प में सामर्थ्य और हौसले बुलंद हैं तो रुकावटें खुद रुक जाती हैं: मोदी

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Dec 30, 2018

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साल 2018 में अपनी सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए रविवार को कहा कि नकारात्मता फैलाना काफी आसान होता है लेकिन अगर संकल्प में सामर्थ्य है, हौसले बुलंद हैं तो रुकावटें खुद ही रुक जाती हैं और कठिनाइयाँ कभी रुकावट नहीं बन सकती हैं। आकाशवाणी पर प्रसारित ‘मन की बात’ के 51वें और 2018 के अंतिम संस्करण में प्रधानमंत्री ने कहा कि 2018 को भारत एक देश के रूप में, अपनी एक सौ तीस करोड़ की जनता के सामर्थ्य के रूप में कैसे याद रखेगा... याद करना भी महत्वपूर्ण है। हम सब को गौरव से भर देने वाला है।

मोदी ने कहा, ‘‘देश के आत्मरक्षा को नई मजबूती मिली है। इसी वर्ष हमारे देश ने सफलतापूर्वक परमाणु त्रिकोण को पूरा किया, यानी अब हम जल, थल और नभ-तीनों में परमाणु शक्ति संपन्न हो गए है।’’ प्रधानमंत्री ने कराटा चैम्पियन 12 साल की हनाया निसार, 16 साल की मुक्केबाजी चैम्पियन रजनी, साइकिल से दुनिया का चक्कर लगाने वाली 20 साल की वेदांगी का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘अगर संकल्प में सामर्थ्य है, हौसले बुलंद हैं तो रुकावटें खुद ही रुक जाती हैं। कठिनाइयाँ कभी रुकावट नहीं बन सकती हैं। अनेक ऐसे उदाहरण जब हम सुनते हैं तो हमें भी अपने जीवन में प्रतिपल एक नयी प्रेरणा मिलती है।’’  उन्होंने कहा, ‘‘ नकारात्मकता फैलाना काफी आसान होता है, लेकिन, हमारे समाज में, हमारे आस-पास बहुत कुछ अच्छे काम हो रहे हैं और ये सब 130 करोड़ भारतवासियों के सामूहिक प्रयासों से हो रहा है।’’ 


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मोदी ने कहा कि हम ऐसा क्या करें जिससे अपने स्वयं के जीवन में बदलाव ला सकें और साथ-ही-साथ देश और समाज को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दे सकें, यह महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जनवरी में कई सारे त्योहार आने वाले हैं जैसे लोहड़ी, पोंगल, मकर संक्रान्ति, उत्तरायण, माघ बिहू आदि। इन त्योहारों के अवसर पर भारत में पारंपरिक नृत्यों का रंग दिखेगा, फसल तैयार होने की खुशी में लोहड़ी जलाई जाएगी, आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें उड़ती हुई दिखेंगी। प्रयाग में आयोजित होने वाले कुंभ मेले का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि कुंभ मेले में आस्था और श्रद्धा का जन-सागर उमड़ता है। एक साथ एक जगह पर देश-विदेश के लाखों करोड़ों लोग जुड़ते हैं। कुंभ की परम्परा हमारी महान सांस्कृतिक विरासत से पुष्पित और पल्लवित हुई है। उन्होंने कहा कि इस बार श्रद्धालु संगम में पवित्र स्नान के बाद अक्षयवट के पुण्य दर्शन भी कर सकेगा। लोगों की आस्था का प्रतीक यह अक्षयवट सैकड़ों वर्षों से किले में बंद था, जिससे श्रद्धालु चाहकर भी इसके दर्शन नहीं कर पाते थे। अब अक्षयवट का द्वार सबके लिए खोल दिया गया है।

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