By रेनू तिवारी | Jul 25, 2026
भारत में स्टूडेंट्स के नेतृत्व वाले प्रोटेस्ट को एक नया साउंडट्रैक मिल गया है। एक महीने से ज़्यादा समय से, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में युवा प्रोटेस्ट करने वालों ने सड़कों को नारों, मज़ेदार प्लेकार्ड, वायरल मीम और सटायरिकल परफॉर्मेंस से भर दिया है। अब, उनके पास एक प्रोटेस्ट एंथम है - जो तेज़ी से मूवमेंट की सबसे ज़ोरदार आवाज़ बन रहा है। देश की तबाही का हिसाब दीजिए टाइटल वाला यह गाना शुक्रवार को जंतर-मंतर पर बजना शुरू हुआ और तेज़ी से इंस्टाग्राम पर फैल गया, जहाँ स्टूडेंट्स इसे रील, वीडियो और प्रोटेस्ट मोंटाज में इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ ही घंटों में, यह चल रहे प्रदर्शनों से जुड़ा सबसे ज़्यादा शेयर किया जाने वाला कंटेंट बन गया।
"मुझको अपने बैंक की किताब दीजिए, देश की तबाही का हिसाब दीजिए"
शीर्षक वाला यह गाना शुक्रवार को जंतर-मंतर पर पहली बार गूंजा और देखते ही देखते सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
जंतर-मंतर से इंस्टाग्राम तक: मिनटों में वायरल हुआ गाना
शुक्रवार को रिलीज़ होने के बाद यह गाना छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों का सबसे बड़ा साउंडट्रैक बन चुका है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर धूम: इंस्टाग्राम, रील्स और यूट्यूब पर युवा इस गाने को अपने प्रोटेस्ट मोंटाज और वीडियो के बैकग्राउंड स्कोर के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
24 घंटे गूंज: जंतर-मंतर पर दिन-रात डटे प्रदर्शनकारी इस गाने को लाउडस्पीकरों पर बजा रहे हैं, जिससे आंदोलन स्थल का माहौल और अधिक ऊर्जावान हो गया है।
गाने के बोल: NEET पेपर लीक से लेकर मणिपुर तक सीधे सवाल
यह गाना केवल एक विरोध गीत नहीं है, बल्कि यह छात्रों द्वारा पिछले कई हफ्तों से उठाए जा रहे बहुआयामी सवालों का एक व्यवस्थित संग्रह है।
एंथम की प्रमुख पंक्तियां:
"मुझको अपने बैंक की किताब दीजिए, देश की तबाही का हिसाब दीजिए।
युवा सारे देश के सड़क पर आ गए, NEET पेपर लीक पर तुम चुप्पी खा गए।
भगवान को भी लूटकर ठेंगा दिखा गए, देश की तबाही का हिसाब दीजिए।
आज़ाद हर आवाज़ को ये शोर कह गए, इंसाफ़ मांगे इनसे ये देश द्रोह कह गए।
तड़पती रही बेटियाँ ये मौन रह गईं, जलते मणिपुर का भी इलाज कीजिए।
मंदिरों के नाम पर तुम वोट ले गए, उसका चंदा रोज़गार और तुम्हारे दोस्त देश बेच के करोड़ ले गए।
नुकसान के ठेकेदार इंसाफ़ कीजिए, देश की तबाही का हिसाब दीजिए।"
यह गाना NEET परीक्षा में हुई धांधली पर सरकार की खामोशी पर हमला बोलने के साथ-साथ असहमति जताने वाले युवाओं को "एंटी-नेशनल" कहे जाने, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा और मणिपुर हिंसा जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर भी सीधा प्रहार करता है।
नारों से आगे बढ़ा विरोध: कला, संगीत और मीम्स बने असहमति के हथियार
जंतर-मंतर पर जारी इस आंदोलन ने यह साबित कर दिया है कि आज की युवा पीढ़ी केवल मार्च निकालने तक सीमित नहीं है।
रचनात्मक सत्याग्रह: प्रदर्शनकारी युवा स्ट्रीट आर्ट, फ्लैश परफॉर्मेंस, कविता, स्टैंड-अप सटायर और वायरल होने वाले प्लेकार्ड्स के जरिए अपनी बात रख रहे हैं।
डिजिटल रीच: हर नारा और प्रदर्शन इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि वह केवल जंतर-मंतर तक सीमित न रहकर सीधे सोशल मीडिया के जरिए करोड़ों लोगों तक पहुँचे।
यह नया एंथम भारत के युवाओं की उस मूल भावना को आवाज देता है, जो हफ्तों से सड़कों पर एक ही सवाल दोहरा रहे हैं: "प्रणालीगत विफलताओं के लिए आखिर किसे जवाबदेह ठहराया जाएगा?"