By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 21, 2026
(संजीत के. रॉय, अली नाजरी तेहरानी और एस. मुस्तफा रसूलिमनेश, एडिथ कोवान विश्वविद्यालय) पर्थ, 21 अक्टूबर (द कन्वरसेशन) कल्पना कीजिए कि आप भारत के ‘गोल्डन ट्रायंगल’ त्रिकोण यानी दिल्ली, आगरा और जयपुर की छुट्टियों पर जाने की योजना बना रहे हैं। इसके लिए आप ढेरों वेबसाइट पर जानकारी जुटा सकते हैं, समीक्षाएं पढ़ सकते हैं और दोस्तों से सुझाव मांग सकते हैं। या फिर आप चैटजीपीटी अथवा जेमिनी को अपनी यात्रा की तारीखें, बजट और रुचियां बता सकते हैं और कुछ ही सेकंड में अपनी यात्रा की पूरी योजना हासिल कर सकते हैं। ऐसा करने वाले आप अकेले नहीं हैं। ऑस्ट्रेलिया के बहुत से लोग पहले से ही इस तरीके को अपना रहे हैं। वयस्क यात्रियों पर किए गए एक हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया के 28.8 प्रतिशत लोगों ने यात्रा के दौरान किफायती विकल्प खोजने, गंतव्यों के बारे में जानकारी जुटाने और अपनी यात्रा की योजना तैयार करने के लिए सृजनात्मक कृत्रिम मेधा (एआई) का इस्तेमाल किया। ऑस्ट्रेलियाई सरकार के शोध के अनुसार, जेन-जी यानी युवा पीढ़ी के यात्रियों में यह आंकड़ा 30 प्रतिशत है। एआई अब यात्रियों और उनके द्वारा चुने जाने वाले पर्यटन स्थलों, होटल तथा यात्रा के दौरान मिलने वाले अनुभवों के बीच एक प्रमुख माध्यम बनता जा रहा है। हमारे नए शोध का उद्देश्य यह समझना था कि किन कारणों से यात्री अपनी यात्रा से जुड़े फैसले एआई मंचों को सौंपने के लिए तैयार होते हैं।
यात्रियों का भरोसा कैसे बढ़ता है? हमारे अध्ययन में पाया गया कि यात्रियों का भरोसा कायम करने में एआई की जवाबदेही की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जब यात्रियों को लगता है कि एआई मंच अपनी सिफारिशों के लिए जिम्मेदार हैं और उन्हें जवाबदेह ठहराया जा सकता है, तो वे उनसे अपने फैसले करवाने के लिए अधिक तैयार होते हैं। इस बीच, आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) के एआई सिद्धांत अधिक पारदर्शिता और व्याख्यात्मक क्षमता के माध्यम से जिम्मेदार एआई को बढ़ावा देते हैं। पारदर्शिता के तहत यह स्पष्ट होना चाहिए कि किसी काम में एआई का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि व्याख्यात्मक क्षमता से आशय एआई की सिफारिशों के पीछे के तर्क को समझा पाने की उसकी क्षमता से है। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया के 421 लोगों पर किए गए हमारे अध्ययन के निष्कर्ष इस आम धारणा को चुनौती देते हैं कि अधिक स्पष्टीकरण देने से हमेशा भरोसा बढ़ता है। हमने सृजनात्मक एआई का इस्तेमाल करने वाले ऑस्ट्रेलिया के यात्रियों का सर्वेक्षण करने का फैसला इसलिए किया, क्योंकि एआई के इस्तेमाल के मामले में ऑस्ट्रेलिया दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है।
पारदर्शिता का विरोधाभास हमारे अध्ययन का सबसे चौंकाने वाला निष्कर्ष पारदर्शिता से जुड़ा था। जिम्मेदार एआई से संबंधित रूपरेखाएं उचित रूप से इस बात पर जोर देती हैं कि संस्थानों को अपनी प्रणालियों की क्षमताओं, सीमाओं और जोखिमों के बारे में स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। ऑस्ट्रेलिया की संघीय सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार एआई को अपनाते समय पारदर्शिता और उसके काम करने के तरीके की व्याख्या इस बात के अनुरूप होनी चाहिए कि एआई का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है, उपयोगकर्ताओं को उसके बारे में कितनी जानकारी है और उससे जुड़े जोखिम कितने हैं। हालांकि, हमारे अध्ययन में एक अलग ही तस्वीर सामने आई। इसके अनुसार, यात्रियों को एआई की कार्यप्रणाली जितनी अधिक पारदर्शी लगी, वे यात्रा से जुड़े फैसलों की जिम्मेदारी उसे सौंपने के लिए उतने ही कम इच्छुक दिखे। यह रुझान फैसले सौंपने के सभी स्तरों पर देखने को मिला। हम इसे ‘पारदर्शिता का विरोधाभास’ कहते हैं। लोग अक्सर एआई का इस्तेमाल इसलिए करते हैं, ताकि उन्हें जानकारी खोजने, विकल्पों की तुलना करने और तथ्यों की जांच करने में मानसिक मेहनत न करनी पड़े। लेकिन यदि एआई प्रणाली इसके बाद यह विस्तार से बताने लगे कि उसने हर उड़ान, समीक्षा और होटल की विशेषता को किस तरह परखा, तो इससे मिलने वाली सुविधा कम होने लगती है। स्पष्टीकरण पढ़ना एक अतिरिक्त गृहकार्य जैसा महसूस होने लगता है। हमारे निष्कर्षों का यह अर्थ नहीं है कि पारदर्शिता बुरी चीज है या कंपनियों को एआई के काम करने के तरीके को छिपाना चाहिए। इसके बजाय, वे बताते हैं कि पारदर्शिता कितनी उपयोगी साबित होगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि जानकारी किस तरह दी जाती है। ऑस्ट्रेलिया के यात्रियों के लिए इसका क्या अर्थ है? ‘टूरिज्म ऑस्ट्रेलिया’ की एक हालिया रिपोर्ट में एआई के माध्यम से पर्यटन स्थलों की खोज यानी यात्रा के बारे में जानकारी जुटाने और उसकी बुकिंग के लिए एआई के इस्तेमाल को एजेंसी की रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है। एजेंसी यह भी मानती है कि यात्री अपने गंतव्य का चुनाव करने और उससे जुड़ी बुकिंग करने के लिए तेजी से एआई तथा एआई एजेंटों का इस्तेमाल कर रहे हैं। मान लीजिए कि आप अपनी अगली विदेश यात्रा की योजना बना रहे हैं। ऐसे में आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए: - जानकारी की तथ्य-जांच करें। उदाहरण के लिए, यह सुनिश्चित करें कि ट्रेन के रवाना होने का समय सही है या नहीं और जिस होटल की सिफारिश की गई है, वह वास्तव में मौजूद है या नहीं। - यह पता करें कि गड़बड़ी होने पर जवाबदेह कौन होगा। यह मानकर न चलें कि अधिक स्पष्टीकरण मिलने का अर्थ यह है कि एआई अधिक भरोसेमंद भी है। भविष्य में यात्रा की योजना बनाने और उससे जुड़े फैसले लेने की प्रक्रिया में मनुष्य और एआई के बीच सहयोग की भूमिका बढ़ने की संभावना है। एआई मंच उपलब्ध जानकारी का विश्लेषण करेगा और यात्रा के विकल्प तैयार करेगा, जबकि अंतिम निर्णय लेने का नियंत्रण यात्री के पास ही रहेगा।