By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 23, 2026
एस्सेल समूह के संस्थापक सुभाष चंद्रा ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की पांच-सदस्यीय पीठ के उस आदेश के खिलाफ अपीलीय न्यायाधिकरण एनसीएलएटी में अपील की है, जिसमें मामले की सुनवाई लंबित रहने तक उन्हें अपनी संपत्तियां हस्तांतरित करने से रोक दिया गया था। एनसीएलटी की पांच-सदस्यीय पीठ ने एक सितंबर के अपने आदेश में चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला प्रक्रिया से जुड़े मामले में तीसरे निर्णायक सदस्य के आदेश पर रोक लगा दी थी। तीसरे सदस्य ने करीब 22,000 करोड़ रुपये की कुल देनदारियों के मुकाबले चंद्रा की 6.5 करोड़ रुपये की पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी थी।
एनसीएलएटी की इस पीठ में कार्यवाहक अध्यक्ष न्यायमूर्ति योगेश खन्ना भी शामिल हैं। चंद्रा ने अपनी याचिका में एनसीएलटी की पांच-सदस्यीय पीठ के आदेश के दायरे पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा है कि पीठ ने सभी लंबित आवेदनों पर नए सिरे से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और उन्हें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से किसी भी संपत्ति को हस्तांतरित करने से रोक दिया।
चंद्रा ने दलील दी कि एनसीएलटी का आदेश कानून के तहत निर्धारित सीमित अधिकार क्षेत्र से आगे जाता है। उन्होंने कहा है कि इससे मतभेद के कुछ बिंदुओं पर निर्णय के लिए की गई संदर्भ प्रक्रिया पूरी कार्यवाही की नए सिरे से सुनवाई में बदल गई है। कंपनी कानून की धारा 419(5) में विभाजित निर्णय की स्थिति में मतभेद के बिंदुओं को अतिरिक्त सदस्यों के पास भेजकर बहुमत के आधार पर निर्णय करने की प्रक्रिया का प्रावधान है।
चंद्रा ने अपनी अपील में एनसीएलटी द्वारा पांच-सदस्यीय पीठ के गठन पर भी सवाल उठाया है। इसके पहले एनसीएलटी की दो-सदस्यीय पीठ ने चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया पर अलग-अलग फैसले दिए थे। पीठ के न्यायिक सदस्य अशोक कुमार भारद्वाज ने चंद्रा की 6.5 करोड़ रुपये की पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी थी और उन्हें व्यक्तिगत गारंटरों के लिए दिवाला व्यवस्था के तहत राहत मांगने का पात्र माना था।
वहीं, तकनीकी सदस्य रीता कोहली ने इससे असहमति जताते हुए समाधान प्रस्ताव खारिज कर दिया था। इसके बाद मतभेद के बिंदुओं पर फैसला करने के लिए न्यायिक सदस्य नीलेश शर्मा को तीसरे सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया था। शर्मा ने प्रमुख मुद्दों पर भारद्वाज से सहमति जताते हुए चंद्रा की पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दे दी।
इस योजना में व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ी करीब 22,006 करोड़ रुपये की देनदारियों का निपटान करीब 6.5 करोड़ रुपये में करने का प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि, बाद में एनसीएलटी की पांच-सदस्यीय पीठ ने शर्मा के आदेश पर रोक लगा दी और आगे की कार्यवाही लंबित रहने तक चंद्रा को अपनी संपत्तियां हस्तांतरित करने से भी रोक दिया।