By अभिनय आकाश | Mar 23, 2026
एक समय था जब बांग्लादेश और भारत के रिश्ते मिसाल माने जाते थे। खासतौर पर जब शेख हसीना सत्ता में थी। तब दोनों देशों के बीच भरोसा चरम पर था। आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम। सीमा विवाद का समाधान और आर्थिक सहयोग। दोनों देशों के बीच एक मजबूत साझेदारी बन चुकी थी। लेकिन फिर आया अगस्त 2024 जिसमें हुए छात्र आंदोलन ने सब कुछ बदल दिया। सरकार बदल गई। शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी और नई अंतरिम सरकार बनाई गई। इसके बाद हालात धीरे-धीरे बिगड़ने लगे। भारत विरोधी बयान, हिंदू समुदाय पर हमले की खबरें और आपसी अविश्वास। रिश्तों में जो गर्मजोशी थी, वह ठंडेपन में बदल गई। फिर बांग्लादेश में चुनाव होते हैं और फिर सत्ता में आई बीएनपी और इसके साथ ही एक नया चेहरा सामने आया।
दूसरी तरफ भारत की ओर से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई यानी त्यौहार के जरिए रिश्तों को सुधारने की कोशिश की गई। अब यह मामला सिर्फ पत्र तक सीमित नहीं रहा। दोनों प्रधानंत्रियों के बीच फोन पर बातचीत हुई। उस स्तर पर संवाद हुआ और सबसे बड़ा संकेत शपथ ग्रहण समारोह में भारत की ओर से लोकसभा स्पीकर की मौजूदगी। यह सब दिखाता है कि भारत भी रिश्तों को सुधारने के लिए तैयार है। इस पत्र में तीन बड़े संकेत थे। पहला इतिहास और भरोसा। रिश्तों की नींव मजबूत है। बस उसे फिर से जगने की जरूरत है। दूसरा जनता के लिए सहयोग। दोनों देशों को मिलकर ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे आम लोगों को फायदा हो और तीसरा भविष्य की साझेदारी। शांति, स्थिरता और विकास के लिए साथ काम करना होगा।