CBI द्वारा नियमित निदेशक नियुक्त नहीं किए जाने पर SC ने जताई निराशा

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Feb 01, 2019

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को केन्द्र से पूछा कि उसने सीबीआई का स्थायी निदेशक नियुक्त क्यों नहीं किया है। साथ ही न्यायालय ने टिप्पणी की कि वह लंबे समय तक एजेंसी के लिए अंतरिम प्रमुख की नियुक्ति के ‘‘विरुद्ध’’ है। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की पीठ ने कहा कि सीबीआई निदेशक का पद संवेदनशील है और सरकार को अब तक इस पद पर स्थायी निदेशक की नियुक्ति कर देनी चाहिए थी। अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने पीठ को बताया कि सीबीआई के नए निदेशक के चयन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उच्चाधिकार प्राप्त समिति शुक्रवार को बैठक करेगी।

इसे भी पढ़ें: CJI के बाद जस्टिस सीकरी ने भी नागेश्वर राव मामले की सुनवाई से खुद को किया अलग

उन्होंने पीठ को यह भी कहा कि केन्द्र ने आईपीएस अधिकारी एम नागेश्वर राव को अंतरिम सीबीआई निदेशक नियुक्त करने से पहले उच्चाधिकार समिति की मंजूरी ली थी। समिति की शुक्रवार को बैठक के बारे में अटॉर्नी जनरल के कथन के बाद न्यायालय ने मामले की सुनवाई छह फरवरी तक स्थगित कर दी। पीठ नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक नियुक्त करने के सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली गैर सरकारी संगठन कॉमन कॉज की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि जांच ब्यूरो के निदेशक की नियुक्ति की प्रक्रिया अब तक पूरी हो जानी चाहिए थी क्योंकि यह पहले से ही मालूम था कि जांच ब्यूरो प्रमुख जनवरी में सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

अटार्नी जनरल ने सीलबंद लिफाफे में उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक का विवरण पेश किया। इस समिति की 24 जनवरी को बैठक हुयी थी जो अधूरी रह गयी थी। गैर सरकारी संगठन के वकील प्रशांत भूषण ने पीठ से कहा कि न्यायालय को जांच ब्यूरो के निदेशक की नियुक्ति की प्रक्रिया में पारदर्शिता के पहलू पर गौर करना चाहिए। पीठ ने भूषण से कहा, ‘आप तत्काल नियुक्ति चाहते हैं। हमें यहीं रूकना होगा। पहले नियुक्ति होने दीजिये। यदि आपको कोई शिकायत हो कि प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और इसमें पारदर्शिता नहीं थी तो आप इसे बाद में चुनौती दे सकते हैं।’

इसे भी पढ़ें: अंतरिम CBI निदेशक नागेश्वर राव ने किया 20 अधिकारियों का तबादला

जांच ब्यूरो के अंतरिम निदेशक के रूप में नागेश्वर राव की नियुक्ति को चुनौती देने वाली इस याचिका पर सुनवाई से तीन न्यायाधीश पहले ही खुद को अलग कर चुके थे। इसके बाद न्यायमूर्ति मिश्रा और न्यायमूर्ति सिन्हा की पीठ का गठन किया गया था। न्यायमूर्ति एन वी रमण ने बृहस्पतिवार को इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। इससे पहले, प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति ए के सीकरी ने भी खुद को अलग कर लिया था। 

All the updates here:

प्रमुख खबरें

ICC T20 Rankings: फ्लॉप प्रदर्शन के कारण अभिषेक शर्मा को नुकसान, पाकिस्तान के साहिबजादा फरहान को बड़ा फायदा

Sheetala Ashtami 2026 Date पर कन्फ्यूजन? जानें 11 या 12 मार्च, क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त

Kejriwal का Mission South! अब Tamil Nadu में DMK के साथ लड़ेगी AAP, BJP के खिलाफ बनाया Plan

ईरान में Regime Change की तैयारी? Reza Pahlavi ने प्रवासियों से कहा- शासन के पतन तक दबाव बनाएं