Supreme Court ने पंजाब के 50 निकाय वार्डों के चुनाव किए रद्द, छह सप्ताह में दोबारा मतदान के निर्देश

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 08, 2026

नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने स्थानीय निकाय चुनावों में नामांकन प्रक्रिया के दौरान ‘‘व्यापक स्तर पर बाधा डाले जाने’’ संबंधी तथ्यान्वेषी आयोग की रिपोर्ट के बाद पंजाब के 50 नगर निकाय वार्ड में हुए चुनाव रद्द कर नये सिरे से चुनाव कराने का आदेश दिया है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने पटियाला जिले के 28 और मोगा के 22 वार्ड में हुए चुनाव रद्द कर दिए। शीर्ष अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश निर्मलजीत कौर की अध्यक्षता वाले एक सदस्यीय आयोग के निष्कर्षों को स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया।

पुनः चुनाव प्रक्रिया छह सप्ताह के भीतर पूरी की जाए।’’ यह आदेश बुधवार रात अपलोड किया गया। शीर्ष अदालत ने पंजाब सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के उस बयान का उल्लेख किया कि राज्य को आयोग की सिफारिशों पर कोई आपत्ति नहीं है। शीर्ष अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से कहा कि वह पुनः चुनाव की प्रक्रिया के लिए उच्च न्यायालय बार के कम से कम दो या तीन वरिष्ठ सदस्यों को ‘पर्यवेक्षक’ नियुक्त करें।

पीठ ने कहा, ‘‘नामांकन पत्र दाखिल करने, उनकी जांच, चुनाव चिह्न आवंटित करने, मतदान आदि की प्रक्रिया की उक्त पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। रिकॉर्डिंग को उचित तरीके से सुरक्षित रखा जाएगा और निगरानी समिति को सौंपा जाएगा।’’ शीर्ष अदालत ने कहा कि किसी भी व्यक्ति द्वारा पुनः चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप या बाधा डालने संबंधी शिकायत निगरानी समिति के समक्ष की जा सकती है। पीठ ने कहा कि निगरानी समिति और पर्यवेक्षकों को दिया जाने वाला मानदेय उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तय करेंगे।

पीठ ने कहा कि पुनः चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को रिपोर्ट सौंपी जाए। पीठ ने कहा, ‘‘पुनः चुनाव प्रक्रिया तभी पूरी मानी जाएगी जब उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर इस बात से संतुष्ट हों कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से कराए गए हैं।’’ कई ऐसे उम्मीदवारों ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का रुख किया था जिन्हें कथित तौर पर नामांकन पत्र दाखिल करने की अनुमति नहीं दी गई थी, या जो पटियाला नगर निकाय में महापौर और उपमहापौर के चुनाव से असंतुष्ट थे। दस जनवरी 2025 को उच्च न्यायालय ने पटियाला नगर निगम में हुए चुनावों को बरकरार रखते हुए कहा था कि कुछ वार्ड में चुनाव स्थगित किया जाना इसमें बाधा नहीं बनेगा।

इस आदेश से असंतुष्ट उम्मीदवारों ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।

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