By अभिनय आकाश | Oct 12, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को साफ़ किया कि उसने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के नए फॉर्म 6 की वैधता पर कभी कोई फ़ैसला नहीं दिया है। कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जब उसने इस साल की शुरुआत में बिहार में वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) की समीक्षा की थी, तब इसका बदला हुआ वर्शन मौजूद ही नहीं था। यह स्पष्टीकरण उस विवाद के बीच अहम हो जाता है जिसमें ECI का दावा है कि सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया के लिए 'फॉर्म 6' के साथ जोड़े गए घोषणा-पत्र को सही ठहराया था। कोर्ट ने कहा कि उसकी पिछली टिप्पणियों को किसी बदले हुए फॉर्म की न्यायिक मंज़ूरी या उसे खारिज करने के तौर पर नहीं देखा जा सकता, और मामला संज्ञान में आने के बाद उसने इस मुद्दे की जांच करने पर सहमति जताई।
5 अक्टूबर को बेंच ने कहा कि उसने 'फॉर्म 6' में किसी भी बदलाव को मंज़ूरी नहीं दी है। बेंच ने यह पता लगाने के लिए रिकॉर्ड माँगे कि ये बदलाव किसने मंज़ूर किए थे और इनमें क्या-क्या शामिल था। कोर्ट ने ECI के ECINet/ERONet पोर्टल पर मौजूद ऑनलाइन फ़ॉर्म में कथित बदलावों को चुनौती देने वाली एक याचिका पर नोटिस जारी किया था। विवाद एक अतिरिक्त घोषणा (डिक्लेरेशन) को लेकर है, जिसमें आवेदकों को यह बताना होता है कि क्या उनका अपना नाम, या उनके माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी का नाम पिछली SIR (मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण) के दौरान तैयार की गई मतदाता सूची में शामिल था। यह घोषणा मौजूदा पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रोसेस में जोड़ी गई थी, जिससे इसके कानूनी आधार और पहली बार वोट देने वालों तथा मतदाता सूची में दोबारा नाम जुड़वाने वालों पर इसके असर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।