By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 19, 2026
उच्चतम न्यायालय ने ग्राहम स्टेंस हत्याकांड में सजायाफ्ता रवींद्र पाल उर्फ दारा सिंह की सजा में छूट संबंधी अर्जी पर फैसला लेने में देरी के लिए ओडिशा सरकार पर बुधवार को नाराजगी जाहिर की। न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने ओडिशा सरकार की ओर से पेश वकील से कहा, “आप जो भी फैसला लेना चाहते हैं, लीजिए। अगर आप फैसला नहीं लेते हैं, तो हम फैसला सुनाएंगे।” पीठ ने कहा, “हम फैसला लेने से बचने की इस तरह की कोशिश को बर्दाश्त नहीं कर सकते।” उसने कहा कि सिंह 26 साल से अधिक समय से सलाखों के पीछे है और मामले की सुनवाई बार-बार इसलिए स्थगित की गई, ताकि संबंधित प्राधिकरण को सजा में छूट के अनुरोध वाली उसकी अर्जी पर फैसला लेने का अवसर मिल सके।
पीठ ने कहा, “हमें सजा समीक्षा बोर्ड के फैसले के बारे में जानकारी नहीं दी गई है।” पीठ ने मामले की अगली सुनवाई दो सितंबर के लिए निर्धारित करते हुए कहा कि बोर्ड को इस मामले में फैसला लेना चाहिए और न्यायालय को इसकी जानकारी देनी चाहिए। पीठ ने कहा, “हमें इस बात से कोई मतलब नहीं है कि आप कैसे या किस प्राधिकारी से बात कर रहे हैं। आप बस, कोई फैसला लें।” उसने कहा, “लेकिन हमें पत्र दिखाकर मामले को टालने की कोशिश न करें... इसका क्या मतलब है?
फैसला तो बोर्ड को ही लेना है।” सिंह (63) ने समय से पहले रिहाई के अनुरोध को लेकर 2024 में शीर्ष अदालत का रुख किया था। उसने दलील दी थी कि वह 24 साल से ज्यादा समय जेल में बिता चुका हैं और “जवानी के जोश में” किए गए कृत्य पर उसे “पछतावा” है। जुलाई 2026 में मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने ओडिशा सरकार को सिंह की सजा में छूट संबंधी अर्जी पर फैसला लेने के लिए एक महीने का समय दिया था।
ओडिशा के क्योंझर जिले के मनोहरपुर गांव में 22-23 जनवरी 1999 की रात को सिंह की अगुवाई वाली भीड़ ने स्टेंस और उसके दो नाबालिग बेटों-फिलिप (11) तथा टिमोथी (8) पर उस समय हमला कर दिया था, जब वे अपनी गाड़ी में सो रहे थे। भीड़ ने गाड़ी में आग लगा दी थी। विशेष सीबीआई अदालत ने मामले के मुख्य आरोपी सिंह को 2003 में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी।
हालांकि, 2005 में ओडिशा उच्च न्यायालय ने उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया और 2011 में शीर्ष अदालत ने इस फैसले को बरकरार रखा।