By अभिनय आकाश | Jul 03, 2024
त्वरित सुनवाई का संवैधानिक अधिकार कथित अपराध की गंभीरता पर निर्भर नहीं हो सकता है, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को जाली मुद्रा मामले में मुकदमा चलाने में देरी के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को कड़ी फटकार लगाई। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने कथित अपराध की गंभीरता के बावजूद, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित सुनवाई के संवैधानिक अधिकार को रेखांकित किया, क्योंकि इसने मामले में आरोपी को जमानत दे दी।
अदालत फरवरी 2024 के बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ एक अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें जावेद गुलाम नबी शेख को जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। उन्हें 2020 में मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था, जिससे कथित तौर पर पाकिस्तान से आए नकली नोटों की बरामदगी हुई थी। एनआईए ने बाद में जांच का नियंत्रण अपने हाथ में लेते हुए दावा किया कि शेख ने फरवरी 2020 में दुबई का दौरा किया था और वहां नकली मुद्रा प्राप्त की थी।