Yadav Ji Ki Love Story पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला! शीर्षक को नहीं माना अपमानजनक, याचिका खारिज

By रेनू तिवारी | Feb 25, 2026

फिल्मों के नाम को लेकर अक्सर होने वाले विवादों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने आगामी फिल्म 'यादव जी की लव स्टोरी' के शीर्षक को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने स्पष्ट किया कि फिल्म का नाम किसी भी तरह से यादव समुदाय की छवि को धूमिल नहीं करता है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में फिल्म के शीर्षक पर प्रतिबंध लगाने और नाम बदलने की मांग की गई थी।

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुयान की बेंच ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि किसी फिल्म के टाइटल को सिर्फ इसलिए गैर-संवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि इससे किसी समुदाय की इमेज खराब होने का डर है।

अपने आदेश में, कोर्ट ने कहा, "हमने रिकॉर्ड में मौजूद मटीरियल पर विचार किया है।" कोर्ट ने कहा, "मुख्य शिकायत यह है कि आने वाली फिल्म का टाइटल यादव कम्युनिटी को समाज में नेगेटिव तरीके से दिखाता है और इसलिए इसे बदला जाना चाहिए।"

हालांकि, बेंच ने कहा, "हम यह नहीं समझ पा रहे हैं कि फिल्म का टाइटल कम्युनिटी को गलत तरीके से कैसे दिखाता है।" कोर्ट ने कहा कि टाइटल में ऐसा कोई एडजेक्टिव या शब्द नहीं है जो यादव कम्युनिटी को नेगेटिव तरीके से दिखाता हो। कोर्ट ने आगे कहा कि उठाई गई आशंकाएं पूरी तरह से बेबुनियाद हैं।

इस मामले को 'घूसखोर पंडित' मामले से अलग करते हुए, बेंच ने कहा कि 'घूसखोर' शब्द का मतलब भ्रष्ट है, जिससे एक कम्युनिटी के साथ नेगेटिव मतलब जुड़ जाता है। हालांकि, मौजूदा मामले में, यादव कम्युनिटी के साथ ऐसा कोई नेगेटिव मतलब नहीं जुड़ा है। यह फिल्म 27 फरवरी, 2026 को बड़े पर्दे पर आएगी।

 

सुप्रीम कोर्ट का तर्क: 'घूसखोर पंडित' से अलग है यह मामला

सुनवाई के दौरान पीठ ने इस मामले की तुलना पिछले 'घूसखोर पंडित' विवाद से की और दोनों के बीच का अंतर स्पष्ट किया। कोर्ट ने कहा:

नकारात्मक विशेषण का अभाव: 'यादव जी की लव स्टोरी' शीर्षक में कोई भी ऐसा विशेषण या शब्द नहीं है जो यादव समुदाय को गलत तरीके से पेश करता हो।

तुलना: 'घूसखोर' शब्द का अर्थ भ्रष्ट होता है, जो किसी समुदाय के साथ जुड़ने पर नकारात्मक अर्थ देता है। लेकिन 'यादव जी' शब्द के साथ ऐसा कोई नकारात्मक भाव नहीं जुड़ा है।

निराधार आशंका: कोर्ट ने कहा कि फिल्म के शीर्षक मात्र से किसी समुदाय की छवि खराब होने का डर पूरी तरह से निराधार है।

कोर्ट की टिप्पणी: "हम यह समझने में असमर्थ हैं कि फिल्म का शीर्षक समुदाय को खराब रोशनी में कैसे चित्रित करता है। केवल इस डर से कि किसी समुदाय की छवि खराब होगी, फिल्म का शीर्षक असंवैधानिक नहीं हो सकता।"

 

प्रमुख खबरें

NEET Paper Leak Controversy | केंद्र सरकार का नरम रुख, प्रदर्शनकारी छात्रों पर नहीं होगी कानूनी कार्रवाई, कड़े कानून का मसौदा तैयार

ICC Rankings: हार के बावजूद भारतीय दिग्गजों का जलवा, Shubman Gill नंबर 2 पर, Joe Root की टॉप 10 में वापसी

CJP Student Movement पर 24 साल बाद फिर साथ दिखे Yuvraj Singh और Mohammad Kaif, दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल

CWG 2026: Putul Sonowal ने World Champion Ryan Bester को हराकर किया बड़ा उलटफेर, भारत की शानदार शुरुआत