e-Challan बकाया होने पर नहीं बनेगा PUC, बार-बार नियम तोड़े तो Driving License होगा सस्पेंड

By अभिनय आकाश | Oct 01, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) को निर्देश दिया कि वे उन मामलों में ऑनलाइन और वाहन से जुड़ी अन्य सेवाओं को रोक दें, जहां ट्रैफिक जुर्माना नहीं भरा गया है। इन सेवाओं में रजिस्ट्रेशन का रिन्यूअल, फिटनेस और प्रदूषण नियंत्रण सर्टिफिकेट (PUC) जारी करना, मालिकाना हक का ट्रांसफर और ड्राइविंग लाइसेंस का रिन्यूअल भी शामिल है। यह कदम सड़क सुरक्षा कानूनों के इलेक्ट्रॉनिक तरीके से पालन को और असरदार बनाने की देशव्यापी कोशिश का हिस्सा है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की बेंच ने यह भी निर्देश दिया कि जिन गाड़ियों पर ई-चालान बकाया हैं, उन्हें सेंट्रल परिवहन पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट किया जाए, ताकि उनकी बिक्री या ट्रांसफर को रोका जा सके। साथ ही, जब तक ट्रैफिक से जुड़े बकाया जुर्माने नहीं भरे जाते, तब तक किसी भी सेंटर को PUC सर्टिफिकेट जारी करने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए। एक से ज़्यादा उल्लंघन के मामलों में, अधिकारियों से कहा गया है कि वे ड्राइविंग लाइसेंस के रिन्यूअल को रोक दें और मौजूदा लाइसेंस को सस्पेंड करने के लिए कदम उठाएं।

इसे भी पढ़ें: Special NIA Court का आदेश, यासीन मलिक समेत 6 अन्य लोगों के खिलाफ PMLA के तहत आरोप तय
इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेंट


कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह भी निर्देश दिया कि वे सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा 28 अक्टूबर, 2025 को तैयार की गई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) को तुरंत लागू करें और मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 की धारा 136A तथा सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स के नियम 167A का पालन करें। इन नियमों के तहत स्पीड कैमरे, CCTV कैमरे और स्पीड गन जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके सड़क सुरक्षा की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और नियमों को लागू करना ज़रूरी है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा गया है कि वे ई-एनफोर्समेंट साइट्स की जानकारी दें और एनफोर्समेंट डिवाइस की खरीद, उन्हें लगाने और कैलिब्रेशन का काम पूरा करें। साथ ही, नेशनल रोड सेफ्टी बोर्ड को इसके लागू होने की निगरानी करने का निर्देश दिया गया है। यह बात ज़ोर देकर कही गई कि इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेंट सिर्फ़ ई-चालान जारी करने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए; इसलिए गाड़ियों की रैंडम चेकिंग का निर्देश दिया गया। साथ ही कहा गया कि अगर किसी गाड़ी पर ऐसा ई-चालान बकाया पाया जाता है जिसका भुगतान नहीं किया गया है, तो अधिकारियों को उसे ज़ब्त करने के लिए ज़रूरी कदम उठाने चाहिए। बेंच ने संशोधित नियम 21(25) पर भी ध्यान दिया, जो 2026 में लागू हुआ था। इसके तहत, एक साल के अंदर मोटर व्हीकल एक्ट या नियमों के तहत पाँच या उससे ज़्यादा अपराध या उल्लंघन करना जनता के लिए परेशानी या ख़तरे का कारण माना जाता है।

प्रमुख खबरें

Gurugram में शादी का झांसा देकर इटली की महिला से 1000 यूरो की ठगी, FIR दर्ज

एशियाई खेलों के फाइनल में China से भिड़ेगी भारतीय महिला Hockey टीम

Rahul Gandhi Balaghat Visit: आदिवासी बच्चों की मौत पर पीड़ितों से मिलेंगे राहुल गांधी, BJP पर साधा निशाना

EVMs और SIR विवाद पर ECI के खिलाफ एकजुट हुआ INDIA गठबंधन, मुंबई में 4 अक्टूबर को बड़ा मार्च