उच्चतम न्यायालय ने लॉरेंस के पार्थिव शरीर को अस्पताल को सौंपने के खिलाफ याचिका खारिज की

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jan 16, 2025

उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को वरिष्ठ वाम नेता एम एम लॉरेंस की बेटियों की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने पिता के पार्थिव शरीर को सरकारी अस्पताल के बजाय उन्हें सौंपे जाने का अनुरोध किया था।

उच्च न्यायालय ने कहा था कि आशा ने यह दावा नहीं किया था कि उसके पिता ने कभी भी ईसाई धार्मिक रीति-रिवाजों और प्रथाओं के अनुसार अपने शव का अंतिम संस्कार करने की इच्छा व्यक्त की थी। लॉरेंस के बेटे सजीवन ने कहा था कि उनके पिता चाहते थे कि उनका शरीर वैज्ञानिक अध्ययन के लिए दान कर दिया जाए।

लॉरेंस का 21 सितंबर, 2024 को 95 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। उनके पार्थिव शरीर को एर्नाकुलम टाउन हॉल में श्रद्धांजलि के लिए रखा गया था लेकिन 23 सितंबर को उस वक्त नाटकीय दृश्य देखने को मिला था जब दिवंगत नेता की बेटी आशा लॉरेंस ने उनके पार्थिव शरीर को मेडिकल कॉलेज को सौंपने के फैसले का विरोध किया।

इसके बाद उन्होंने अपने पिता के पार्थिव शरीर को शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए मेडिकल कॉलेज को दान करने के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उनकी बहन सुजाता भी उनके साथ शामिल हो गईं और उन्होंने भी यही राहत मांगी।

उच्च न्यायालय ने 23 अक्टूबर को उनकी याचिकाएं खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने इसके खिलाफ अपील दायर की। मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों ने कहा था कि लॉरेंस के बेटे सजीवन द्वारा दायर हलफनामे के अनुसार, कम्युनिस्ट नेता ने मार्च 2024 में दो गवाहों के सामने अपने पार्थिव शरीर को शैक्षणिक उद्देश्यों के वास्ते कॉलेज को सौंपने के लिए अपनी सहमति दी थी।

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