By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 30, 2026
उच्चतम न्यायालय ने रिश्ता टूटने के बाद आपराधिक मामले दर्ज कराने के बढ़ते चलन पर चिंता जताते हुए शुक्रवार को कहा कि मधुर संबंधों के दौरान बने यौन संबंध को बाद में सिर्फ इसलिए दुष्कर्म नहीं माना जा सकता कि संबंध खराब हो गए या टूट गए हैं। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि उन मामलों के बीच अंतर करना जरूरी है जहां यौन संबंध बनाने की सहमति शुरू से ही कानूनी रूप से अमान्य होती है क्योंकि वह जानबूझकर धोखे और छल से हासिल की गई होती है। साथ ही, जिन मामलों में कोई महिला रिश्ते के खत्म हो जाने के कारण, पूर्व में आपसी सहमति से किये गए कार्यों पर बाद में पछतावा महसूस करती है।
ऐसा इसलिए होता है कि किसी समय आपसी सहमति से बने यौन संबंध के कारण, वह व्यक्ति भविष्य में दुष्कर्म का आरोप लगने के डर से पूरी तरह उसी रिश्ते में बंध कर रह जाएगा। पीठ ने कहा, ‘‘ऐसी स्थिति में, क्या यह कहा जा सकता है कि पुरुष को रिश्ते से बाहर निकलने का कोई अधिकार नहीं है? क्या उसके इस फैसले को छल या धोखाधड़ी माना जा सकता है?
बिल्कुल नहीं।’’ पीठ ने कहा कि न्यायालय ने बार-बार एक चिंताजनक चलन देखा है, जिसमें असफल रिश्तों को आपराधिक मामलों में बदल दिया जाता है। न्यायालय ने आगाह करते हुए कहा कि दुष्कर्म का आरोप एक अत्यंत गंभीर अपराध है, इसलिए इसे केवल उन्हीं स्थितियों के लिए रखा जाना चाहिए जिनमें असल में यौन हिंसा हुई हो, जबरदस्ती की गई हो या सहमति हासिल करने में छल किया गया हो। पीठ ने कहा, ‘‘जब आपसी सहमति से बने संबंध में खटास आने पर उसे दुष्कर्म के आरोप में बदल दिया जाता है, तो इससे कथित अपराध की गंभीरता कम हो जाती है, या यूं कहें कि अपराध का आरोप ही व्यर्थ हो जाता है।’’ मामले के आरोपी संतोष कुमार एन.पी. ने केरल उच्च न्यायालय द्वारा उनकी आरोप मुक्त करने संबंधी याचिका खारिज किए जाने और उनके खिलाफ जारी कार्यवाही को रद्द करने की मांग संबंधी याचिका को अस्वीकार किये जाने के फैसले को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने अपनी पहली शादी को छिपाकर उससे दूसरी शादी की, और धोखाधड़ी से की गई इस ‘‘गैर-कानूनी शादी’’ के आधार पर उसकी सहमति से उसके साथ यौन संबंध बनाए। वहीं, पीड़िता ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने उसे यह विश्वास दिलाकर कि उनकी शादी कानूनी रूप से वैध है, छल से उसके साथ यौन संबंध बनाए। यह भी आरोप है कि व्यक्ति ने अपनी पहली शादी के बरकरार रहने के दौरान ही उससे शादी की थी।
महिला, जिसका अपने पहले पति से तलाक हो चुका है, ने आरोपी पर दुष्कर्म, धोखाधड़ी और विश्वासघात का आरोप लगाया था। उसने दावा किया कि मैसूर में शादी करने के बाद, वे 1996 से 2003 तक साथ रहे।